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Jawhar Sirca: तृणमूल छोड़ चुके जवाहर सरकार का राज्यसभा से इस्तीफा मंजूर; आरजी कर कांड के बाद उठाया था कदम

Thu, 19 Sep 2024 11:46 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सरकार ने यह भी घोषणा की थी कि वह पूरी तरह से राजनीति छोड़ देंगे। सरकार के इस्तीफे के बाद तृणमूल कांग्रेस के अब ऊपरी सदन में 12 सदस्य बचे हैं।
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Jawar Sircar - फोटो : X/@jawharsircar
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विस्तार
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कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में दुष्कर्म-हत्याकांड के बाद पश्चिम बंगाल में टीएमसी सरकार के कदमों पर सवाल उठाने वाले जवाहर सरकार का राज्यसभा से इस्तीफा गुरुवार को मंजूर कर लिया गया। राज्यसभा सभापति और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने तत्काल प्रभाव से राज्यसभा सदस्य के रूप में उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया।

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सरकार ने हाल ही में अपनी पार्टी प्रमुख और राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर कहा था कि आरजी कर अस्पताल में जूनियर डॉक्टर के दुष्कर्म और हत्या से निपटने में उनकी सरकार के कदम बहुत कम और काफी देर से उठाए गए हैं। उन्होंने यह भी घोषणा की थी कि वह पूरी तरह से राजनीति छोड़ देंगे। सरकार के इस्तीफे के बाद तृणमूल कांग्रेस के अब ऊपरी सदन में 12 सदस्य बचे हैं।

ममता के लिए झटका क्यों?
नौकरशाह से राजनीतिज्ञ बने सरकार की बतौर ईमानदार और बेबाक नेता के रूप में राज्य में काफी प्रतिष्ठा है। उन्होंने न सिर्फ प्रशिक्षु महिला चिकित्सक मामले में सीएम ममता बनर्जी की भूमिका पर सवाल उठाए, बल्कि राज्य सरकार और पार्टी में बढ़ते भ्रष्टाचार को लेकर भी लगातार निशाना साधा।
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क्यों पार्टी छोड़ी थी?
इससे पहले जवाहर सरकार ने 8 सितंबर को ममता बनर्जी को पत्र लिखकर पार्टी छोड़ने और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने का फैसला किया था। उन्होंने राजनीति छोड़ने का एलान भी किया था। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी जवाहर सरकार ने दावा किया था कि पार्टी नेताओं के एक वर्ग का भ्रष्टाचार में शामिल है। उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है। यह फैसला लेने के पीछे सबसे बड़ी वजह यही है।

सरकार ने पत्र में कहा था कि आरजी कर अस्पताल में हुई भयावह घटना के बाद एक महीने तक मैंने धैर्यपूर्वक पीड़ा सही। मैं उम्मीद कर रहा था कि ममता बनर्जी अपनी पुरानी शैली में आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टर्स से बात करेंगी, पर ऐसा नहीं हुआ और सरकार अब जो भी दंडात्मक कदम उठा रही है, वह बहुत अपर्याप्त और काफी देर से उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि अगर भ्रष्ट चिकित्सकों के समूह पर कार्रवाई की जाती और अनुचित प्रशासनिक कार्रवाई के दोषियों को निंदनीय घटना के तुरंत बाद दंडित किया जाता, तो राज्य में बहुत पहले ही सामान्य स्थिति बहाल हो गई होती।

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