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रेलवे पुलिस फोर्स: थाने में बुला और दबाव डाल कोरे कागजों पर साइन लेने वाले अब नपने के लिए रहें तैयार

Thu, 20 May 2021 06:50 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

डीजी अरुण कुमार ने हाल ही में ये आदेश जारी करते हुए कहा कि किसी भी तरह की गिरफ्तारी को बिना कोई देरी किए 'रोजनामचा या डेली डायरी' में लिखना है। गिरफ्तारी के लिए सीआरपीसी में जो कायदे कानून दिए गए हैं, उनका पालन करना हैं। इसके अलावा संवैधानिक अदालतों द्वारा इस संबंध में दिए गए फैसलों को भी ध्यान में रखना है...
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रेलवे सुरक्षा बल - फोटो : PTI (File Photo)
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विस्तार
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रेलवे पुलिस फोर्स 'आरपीएफ' में कुछ अधिकारियों व कर्मियों द्वारा कथित तौर पर कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया जा रहा है। कई ऐसे मामले रेलवे मंत्रालय के संज्ञान में आए हैं। इनमें से कुछ केस ऐसे भी हैं, जिनमें आरपीएफ कर्मी द्वारा किसी व्यक्ति को फोन कर थाने या चौकी में बुलाया जाता है। वहां उस व्यक्ति पर दबाव डालकर कोरे कागज पर दस्तखत करा लिए जाते हैं। दबाव के जरिए बॉन्ड, बेल बॉन्ड व स्टेटमेंट पर भी संबंधित व्यक्ति के दस्तखत ले लेते हैं।

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आरपीएफ के डीजी अरुण कुमार ने उक्त मामले के सामने आने के बाद सख्त लहजे में आदेश जारी किए हैं। इसमें बल के कर्मियों को चेताया गया है कि उन्होंने इस तरह की कोई गैर कानूनी हरकत की तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। किसी आरोपी को पूछताछ के लिए बुलाना है, हिरासत में लेना है या उसे जांच पड़ताल के बाद छोड़ना है, इन सभी मामलों में सीआरपीसी या जो भी दूसरा कानून है, उसी के दायरे में रहते हुए कार्रवाई करनी है। इसके बाहर जाकर काम करने वाले कर्मी नपेंगे।

डीजी अरुण कुमार ने हाल ही में ये आदेश जारी किए हैं। इनमें कहा गया है कि किसी भी तरह की गिरफ्तारी को बिना कोई देरी किए 'रोजनामचा या डेली डायरी' में लिखना है। गिरफ्तारी के लिए सीआरपीसी में जो कायदे कानून दिए गए हैं, उनका पालन करना हैं। इसके अलावा संवैधानिक अदालतों द्वारा इस संबंध में दिए गए फैसलों को भी ध्यान में रखना है। कोई भी अधिकारी या कर्मी, किसी व्यक्ति को बिना जरूरत के थाने में नहीं बुलाएगा। उसे जबरन हिरासत में नहीं रखा जाएगा।
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जांच पड़ताल के दौरान कोई व्यक्ति हिरासत में लिया जाता है या उसे पूछताछ के लिए बुलाया जाता है तो वह सब निर्धारित रिकॉर्ड में दर्ज रहेगा। जैसे रोजनामचा, डेली डायरी या केस डायरी आदि में अंकित करना होगा। डिस्पोजल के दौरान भी ऐसा व्यक्ति रिकार्ड पर होना चाहिए। आरपीएफ में कुछ इस तरह के केस सामने आए हैं, जिनमें आरपीएफ का कोई कर्मी किसी व्यक्ति को निजी फोन कॉल कर उसे थाने में बुला लेता है। वहां उस व्यक्ति पर दबाव डालकर कोरे कागज, बयान या बेल बॉंड पर उसके हस्ताक्षर करा लिए जाते हैं। यदि ऐसा कोई मामला साबित होता है तो आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

नियमों से परे हटकर आरपीएफ की कस्ट्डी में मौजूद व्यक्ति से कुछ नहीं लेना है। पूछताछ के लिए बुलाए गए व्यक्ति के साथ भी यही नियम लागू होगा। इस संबंध में कानूनी प्रक्रिया है, उसी का पालन करना है। बॉन्ड या बेल बॉन्ड भरने के लिए सीआरपीसी में जो प्रक्रिया दी गई है, उसी के मुताबिक फॉर्म भरा जाएगा। यदि कोई व्यक्ति गिरफ्तार किया जाता है या उसे छोड़ा जाता है तो यह सूचना अविलंब डिविजनल सिक्योरिटी कंट्रोल रूम और ट्रायल कोर्ट को दी जाएगी। बॉन्ड या बेल बॉन्ड पर छोड़े गए व्यक्ति की सूचना डिविजनल सिक्योरिटी कंट्रोल रूम के जरिए सीनियर डीएससी व डीएससी के पास भेजेंगे। ऐसे आरोपी जो किसी प्रक्रिया के तहत रिहा होते हैं, उनके दस्तावेज किसी अलग रजिस्टर में रखे जाने चाहिए। समय-समय पर आला अधिकारी थाने या चौकी में जाकर इस रजिस्टर की जांच करेंगे।

यह भी देखने में आया है कि सभी गिरफ्तार व्यक्तियों की सूचना संबंधित अधिकारियों तक नहीं पहुंचती। सीआरपीसी में यह विवरण दिया गया है कि किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के बाद वह सूचना किसके पास जाएगी। हाईकोर्ट द्वारा इस बाबत समय समय पर दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। वरिष्ठ अधिकारी केवल अपने दफ्तर में न बैठे रहें। उन्हें थाने व चौकियों में जाकर निरीक्षण करना होगा। उनके संज्ञान में ऐसा कोई कर्मी आता है जो सीआरपीसी का उल्लंघन कर रहा है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

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