सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संभल की मुगलकालीन जामा मस्जिद के बाहर विवादित कुएं को लेकर दी गई स्थिति रिपोर्ट पर जवाब दाखिल करने को कहा। शीर्ष कोर्ट ने समिति को इसके लिए दो हफ्ते का समय दिया। शीर्ष कोर्ट ने 10 जनवरी को संभल के जिलाधिकारी को निर्देश दिया था कि कुएं पर यथास्थिति को बनाए रखें।
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संभल की शाही जामा मस्जिद प्रबंधन समिति की याचिका पर विचार करते हुए शीर्ष कोर्ट ने केंद्र सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के महानिदेशक, संभल के जिलाधिकारी और हरिशंकर जैन के नेतृत्व में हिंदू पक्ष के अन्य निजी पक्षकारों को नोटिस जारी किया। आज चीफ जस्टिस (सीजेआई) संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम.नटराज ने बताया कि कुआं एक पुलिस के पास 'पूरी तरह से मस्जिद से बाहर' है।
इस पर बेंच ने मस्जिद समिति को दो हफ्ते के भीतर स्थिति रिपोर्ट पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मस्जिद समिति की ओर से वरिष्ठ वकील हुजेफा अहमदी पेश हुए। उन्होंने बेंच से आग्रह किया कि मस्जिद समिति के प्रमुख जफर अली जेल में हैं, इसलिए तीन हफ्तों का समय दिया जाए। जफर अली को 23 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। उनकी यह गिरफ्तारी 24 नवंबर 2024 को मस्जिद के सर्वेक्षण के विरोध के दौरान हुई हिंसा के मामले में हुई। चीफ जस्टिस खन्ना ने कहा, जेल में मुलाकात करें और जवाब दाखिल करें। कोई भी समिति की ओर से जवाब दाखिल कर सकता है। कृपया दो हफ्तों में ही इसे पूरा करें। इसके ही अदालत ने सुनवाई को टाल दिया।
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मस्जिद समिति ने अपनी याचिका में कहा है कि संभल जिला प्रशासन शहर के पुराने मंदिरों और कुओं को पुनर्जीवित करने का अभियान चला रहा है। इसमें कम से कम 32 पुराने मंदिर और 19 कुएं शामिल हैं। याचिका में कहा, इस सूची में वह कुआं भी शामिल है, जो मस्जिद परिसर में है। बेंच ने जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि वह मस्जिद के पास स्थित कुएं के बारे में किसी भी नोटिस को लागू न करें और यथास्थिति को बनाए रखें। याचिका में मांग की गई कि संभल के जिलाधिकारी को निर्देश दिया जाए कि मस्जिद की सीढ़ियों/प्रवेश द्वार के पास स्थित निजी कुएं को लेकर कोई कार्रवाई न करें, जब तक कि कोर्ट से अनुमति न ली जाए।