यह भी पढ़ें: NPB: नए संसद भवन के पक्ष में खड़ी हुईं ये राजनीतिक पार्टियां, कहा- यह गर्व की बात, हम हमेशा विपक्ष के साथ नहीं
राष्ट्रपति के उच्च पद का अपमान
विपक्षी दलों ने कहा, राष्ट्रपति के बिना संसद कार्य नहीं कर सकती है, फिर भी प्रधानमंत्री ने उनके बिना नए संसद भवन का उद्घाटन करने का निर्णय लिया है। यह अशोभनीय कृत्य राष्ट्रपति के उच्च पद का अपमान करता है। यह संविधान के पाठ और उसकी भावना का उल्लंघन है। यह सम्मान के साथ सबको साथ लेकर चलने की उस भावना को कमजोर करता है, जिसके तहत देश ने अपनी पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति का स्वागत किया था। विपक्ष द्वारा प्रधानमंत्री और उनकी सरकार के खिलाफ लड़ाई रहेगी। हम अपना संदेश सीधे भारत के लोगों तक ले जाएंगे। 19 विपक्षी दलों के बहिष्कार पर संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी बोले, स्पीकर संसद के संरक्षक होते हैं। स्पीकर ने ही प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया है। अमित शाह ने कहा, 'सेंगोल' की स्थापना 15 अगस्त, 1947 की भावना को अविस्मरणीय बनाती है। यह असीम आशा, अनंत संभावनाओं और एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण का संकल्प है। यह अमृतकाल का प्रतिबिंब होगा, जो नए भारत को विश्व में अपने यथोचित स्थान को ग्रहण करने के गौरवशाली क्षण का साक्षी बनेगा।