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Durga Puja: दुर्गा पूजा में दिखेगा आरजी कर मामले का असर, सती जैसी पुरानी प्रथाओं की कलाकृतियों से सजेंगे पंडाल

Wed, 18 Sep 2024 03:27 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

दुर्गा पूजा आयोजकों का एक वर्ग अपनी योजनाओं के अनुसार आगे बढ़ रहा है। उनका मानना है कि त्योहार को अन्य मुद्दों के साथ नहीं जोड़ा जा सकता। वहीं एक वर्ग ने निर्णय लिया है कि वे नौ अगस्त की भयावह घटना को भित्तिचित्रों के माध्यम से दर्शाएंगे।
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दुर्गा पूजा के लिए मूर्ति बनाता मूर्तिकार (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल में आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में प्रशिक्षु महिला डॉक्टर की दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले को लेकर देशभर में नाराजगी है। अब इस क्रूर घटना का असर दुर्गा पूजा में भी दिखाई देगा। दरअसल, इस साल के दुर्गा पूजा उत्सव के अनगिनत विषयों में विधवाओं के आत्मदाह की पुरानी प्रथा ‘सती-दाह’ और अजंता गुफा की कलाकृतियां शामिल होंगी। इसके अलावा, कोलकाता के एक पंडाल के आसपास भित्तिचित्रों में भी दिखाई देंगी।

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हर साल सामाजिक मुद्दों को उठाया जाता है
हर साल पश्चिम बंगाल में कई पूजा आयोजक सामाजिक मुद्दों और वर्तमान घटनाओं से संबंधित विषय चुनते हैं। इन मुद्दों को दिखाने के लिए पूजा आयोजक अपने पंडालों, मूर्तियों और लाइटों का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, इस बार प्रशिक्षु महिला डॉक्टर के साथ हुई क्रूर घटना पर जूनियर डॉक्टर लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। साथ ही इस बात पर बहस छिड़ी हुई है कि क्या इस दुखी माहौल में पूजा को धूमधाम से मनाया जाना चाहिए।
 
दुर्गा पूजा के आयोजक दो वर्गों में बंटे
दुर्गा पूजा आयोजकों का एक वर्ग पहले से बनाई गई अपनी योजनाओं के अनुसार आगे बढ़ रहा है। उनका मानना है कि त्योहार को अन्य मुद्दों के साथ नहीं जोड़ा सकता। वहीं एक वर्ग ने निर्णय लिया है कि वे नौ अगस्त की भयावह घटना को पंडाल के चारों ओर भित्तिचित्रों के माध्यम से दर्शाएंगे।
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दक्षिण कोलकाता में नक्तला नाबापल्ली दुर्गापूजा समिति के एक आयोजक ने कहा, 'उत्सव के दौरान हम तिलोत्तोमा के लिए न्याय की मांग करते हुए पोस्टर लगाएंगे। हमारे इलाके और पंडाल की ओर जाने वाली सड़कों पर महिलाओं की सुरक्षा की मांग करते हुए भित्तिचित्र बनाए जाएंगे।' बता दें, कुछ पत्रकारों ने मृतक डॉक्टर को तिलोत्तोमा नाम दिया है।

यह कलाकृतियां बनाई जाएंगी
एक पूजा समिति के प्रवक्ता ने कहा, 'हमारे पंडाल में महिलाओं पर हमलों से मुक्त विश्व की मांग, यौन शोषण पीड़ितों के लिए न्याय और महिलाओं को रात्रि विश्राम का अधिकार देने की मांग वाली भित्तिचित्र होंगी। ये कलाकृतियां कला महाविद्यालयों के छात्रों और स्थानीय लोगों द्वारा बनाई जाएंगी।'

उन्होंने कहा कि 'जस्टिस फॉर आरजी कार' यानी आरजी कर मामले में न्याय और 'वी वांट जस्टिस' यानी हम न्याय चाहते हैं जैसे शब्दों वाले पोस्टरों को लाल और काले रंग से रंगा जाएगा।

राममोहन राय और ईश्वरचंद्र विद्यासागर को भी दी जाएगी श्रद्धांजलि
महानगर में पूजा पंडाल में महिलाओं पर अलग-अलग रूपों और अलग-अलग युगों में हुए हमलों का मुद्दा भी उठेगा। उत्तर कोलकाता में सबसे भीड़भाड़ वाली काशी बोस लेन में 19वीं सदी के समाज सुधारक राममोहन राय और ईश्वरचंद्र विद्यासागर को श्रद्धांजलि दी जाएगी। बंगाल के इन दो महापुरुषों ने क्रमशः पति की मृत्यु के बाद महिलाओं को जला देने तथा विधवा पुनर्विवाह जैसे कलंक को दूर करने जैसी बुराइयों को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

इनके बच्चों ने भी समाज में छोड़ी छाप
आयोजकों ने श्रद्धांजलि देने के लिए जो थीम रखी है, वो 'रत्नगर्भ' (रत्न जैसे बच्चों को जन्म देने वाली महिलाएं) की परिकल्पना से जुड़ी है। पूजा समिति के महासचिव सोमेन ने बताया, 'इन दो सुधारकों के कामों की वजह से हजारों महिलाओं की जान बचाई जा सकीं। उनमें से कई के बच्चों ने बाद में समाज में अपनी छाप छोड़ी। हमारे मूर्तिकार और थीम कलाकार रिंटू दास ने मूर्ति को इस तरह से गढ़ा है कि आगंतुक खुद को गर्भ में पल रहे बच्चे के रूप में देख सकते हैं।'

विधवाओं दिखाएंगे रंग-बिरंगी तितलियों के साथ 
पंडाल के प्रवेश द्वार पर राममोहन राय की 20 फुट ऊंची अर्धपारदर्शी तस्वीर होगी और एक जलता हुआ कपड़ा होगा, जिसके नीचे अपने मृत पतियों की चिताओं पर मरने के लिए मजबूर महिलाओं के मॉडल रखे जाएंगे। दत्ता ने कहा कि पंडाल के अंदर उस समय की विधवाओं की यात्रा को अलग दिखाने के लिए रंग-बिरंगी तितलियों के साथ देखा जा सकता है।

दक्षिण कोलकाता के पूजा आयोजक संतोषपुर लेक पल्ली, अजंता की गुफाओं में मिली चट्टानों की नक्काशी को पेश करते हुए 'चलचित्रो' (पृष्ठभूमि) थीम पर अमल करने की तैयारी कर रहे हैं। पूजा समिति के वरिष्ठ सदस्य सोमनाथ दास ने कहा, 'हमारी पूजा 1909 से भारतीय चित्रकारों पर अजंता गुफा चित्रों के प्रभाव को दिखाएगी। पूरा पंडाल अजंता कला विद्यालय पर आधारित एक संग्रहालय में बदल जाएगा।'

इस कविता की पंक्तियां का भी होगा इस्तेमाल
दक्षिण कोलकाता में भवानीपुर 75 पल्ली ने अपनी पूजा को 'टोबू तोमर कच्चे अमर हृदय' (फिर भी मेरा दिल आपके लिए जाता है) पर रखा है, जो 20वीं शताब्दी के लोकप्रिय बंगाली कवि जीवनानंद दास की एक कविता की पंक्तियां हैं। 

पूजा समिति के प्रवक्ता सुबीर दास ने कहा कि यह हमारे पसंदीदा शहर कोलकाता और इसके बदलते परिदृश्य के बारे में है। इन पूजा समितियों के सदस्यों ने ऐसे त्योहार के विचार का समर्थन नहीं किया, जो अपने रंग से रहित हो, जैसा कि आरजी कर घटना के खिलाफ प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग द्वारा मांग की गई थी।

त्योहार भी कई मायनों में महत्वपूर्ण: सुबीर दास
दास ने कहा, 'कोलकाता की दुर्गा पूजा को यूनेस्को की अमूर्त विरासत का दर्जा दिया गया है। पांच दिनों तक पूरा शहर एक आर्ट गैलरी में बदल जाता है, लोगों को इसे देखने की अनुमति दी जानी चाहिए। हम सभी चाहते हैं कि इस बर्बर अपराध में शामिल लोगों को सजा मिले। लेकिन त्योहार भी कई मायनों में महत्वपूर्ण है।



यह है मामला
गौरतलब है, अस्पताल के सेमिनार कक्ष में नौ अगस्त को प्रशिक्षु डॉक्टर का शव मिला था। घटना के विरोध में देशव्यापी प्रदर्शन हो रहे हैं। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर इस सिलसिले में कोलकाता पुलिस के नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को गिरफ्तार किया था। फुटेज में रॉय तड़के सुबह चार बजकर तीन मिनट पर सेमिनार कक्ष की ओर जाता दिखा था। तनाव बढ़ता देख कलकत्ता हाईकोर्ट ने 13 अगस्त को जांच सीबीआई को सौंप दी थी। बाद में सीबीआई ने कार्रवाई कर पूर्व प्रधानाचार्य संदीप घोष और ताला पुलिस थाने के प्रभारी अभिजीत मंडल को भी गिरफ्तार कर लिया था।

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