कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू
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सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ 32 साल पुराने रोडरेज मामले में अपने फैसले के खिलाफ 25 फरवरी को समीक्षा याचिका की सुनवाई करेगा। यह मामला जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस एसके कौल की पीठ के सामने सुनवाई के लिए आया। पीठ ने सिद्धू के वकील पी चिदंबरम के अनुरोध पर सुनवाई के लिए 25 फरवरी की तारीख तय की। चिदंबरम ने 23 फरवरी के बाद सुनवाई का आग्रह किया था। सिद्धू अभी पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष है और राज्य में मतदान के लिए 20 फरवरी की तारीख तय है।
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को 15 मई 2018 को दरकिनार कर दिया था जिसमें रोडरेज के मामले में सिद्धू को गैरइरादतन हत्या का दोषी ठहराते हुए तीन साल कैद की सजा सुनाई थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू को एक 65 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक को जानबूझकर चोट पहुंचाने का दोषी माना था लेकिन उन्हें जेल की सजा नहीं दी थी और 1000 रुपये का जुर्माना लगाया था। भारतीय दंड संहिता की धारा 323 के तहत इस अपराध के लिए अधिकतम एक साल जेल की सजा या 1000 रुपये जुर्माने या दोनों का प्रावधान है।
शीर्ष अदालत ने सिद्धू के सहयोगी रूपिंदर सिंह संधू को भी यह कहते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया था कि घटनास्थल पर उसकी मौजूदगी के कोई पुख्ता सुबूत नहीं हैं। मामले में मृतक के परिजनों ने 2018 में ही समीक्षा याचिका दाखिल की थी।
ये था घटनाक्रम
घटना दिसंबर 1988 की है। पटियाला में सड़क पर सिद्धू और संधू के साथ 65 वर्षीय गुरनाम सिंह तथा दो अन्य लोगों की कहासुनी हुई थी। आरोप है कि इस झगड़े में गुरनाम की पिटाई हुई जिससे बाद में उनकी मौत हो गई थी। निचली अदालत ने सिद्धू को हत्या के आरोप से बरी कर दिया था लेकिन हाईकोर्ट ने 2006 में इस फैसले को पलट कर गैरइरादतन हत्या का दोषी करार दिया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले में मेडिकल साक्ष्यों को अनिश्चित करार दिया था।