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सर्वे में खुलासा: स्कूलों में असेंबली और साथ बैठकर टिफिन खाने को लेकर चिंतित हैं अभिभावक

Tue, 14 Sep 2021 06:40 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

लोकल सर्किल के सर्वे में सामने आया कि 41 फीसदी बच्चे अपने क्लास रूम में बैठक कर अपना टिफिन खा रहे हैं। जिससे कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। वहीं 51 फीसदी अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों में इंडोर असेंबली हो रही है। इससे बच्चों में वायरस फैलने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ सकता है...
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स्कूलों में बच्चे - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच देश के कई राज्यों में स्कूल फिर से खुलने लगे हैं। लेकिन अभी भी अभिभावक स्कूलों में होने वाली असेंबली और दूसरे बच्चों के साथ बैठकर टिफिन खाने से चिंतित नजर आ रहे हैं। अभिभावकों का मानना है कि इससे कोरोना संक्रमण तेजी बढ़ सकता है और बच्चों के जरिए कोरोना हर घर में पहुंच सकता है।

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इसका खुलासा लोकल सर्किल संस्था के हाल ही में हुए सर्वे में हुआ है। लोकल सर्किल कोरोना काल में बच्चों की शिक्षा और उन्हें स्कूल भेजने तक अभिवावकों से लगातार प्रतिक्रिया ले रहा है। संस्था के ताजा सर्वे में सामने आया है कि स्कूलों में बच्चों और टीचर्स के हर समय मास्क पहनने वाले नियम से अभिभावक संतुष्ट नजर नजर आ रहे हैं। जबकि स्कूलों में सामाजिक दूरी के नियमों का पालन ठीक तरीके नहीं होने से वे थोड़े चिंतित हैं।

सर्वे में सामने आया कि 41 फीसदी बच्चे क्लास रूम में बैठक कर अपना टिफिन खा रहे हैं। जिससे कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। वहीं 51 फीसदी अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों में इंडोर असेंबली हो रही है। इससे बच्चों में वायरस फैलने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ सकता है। इसलिए स्कूलों में बच्चों की असेंबली या तो बंद किया जाना चाहिए या फिर बाहर खुले मैदान में सामाजिक दूरी के नियम का पालन करते हुए कराई जानी चाहिए।
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सर्वे में अभिभावकों ने यह भी कहा कि कोरोना प्रोटोकाल को देखते हुए क्लास रूम खुले हुए होने चाहिए। 36 फीसदी अभिभावकों का कहना है कि उनके बच्चों की क्लास में एयर वेंटिलेशन नहीं है। कई जगह खिड़कियां हैं नहीं, वहीं कई स्कूलों में खिड़कियां हैं तो वे बंद हैं। उनका कहना है कि स्कूलों में अधिकांश शिक्षकों को प्रोटोकाल की जानकारी भी नहीं है।

हालांकि इस सर्वे में 84 फीसदी अभिभावकों ने माना कि स्कूलों में बच्चों और टीचर्स के चेहरे पर मास्क लगाने वाले नियम का अच्छे से पालन किया जा रहा है। जबकि 70 फीसदी अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों में सोशल डिस्टेंसिंग और स्वच्छता के मापदंड का ठीक से पालन किया जा रहा है।

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