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अर्धसैनिक बलों पर 'SHO' की कमांड: कभी मुख्य सचिव को रिपोर्ट करने वाले CAPF कमांडर अब मान रहे दरोगा का 'फरमान'

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जितेंद्र भारद्वाज Updated Sat, 26 Mar 2022 07:30 PM IST

सार

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों 'सीएपीएफ' में कई व्यवस्थाओं को लेकर पूर्व अधिकारियों ने नाराजगी जाहिर की है। पूर्व अधिकारियों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय में वरिष्ठ सुरक्षा सुलाहकार के. विजय कुमार और सीआरपीएफ के डीजी कुलदीप सिंह से एक व्यवस्था बनाने का आग्रह किया है। इस व्यवस्था में राज्यों की पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के बीच पारस्परिक ट्रेनिंग का प्रावधान होना चाहिए...
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वेटरन डे पर सीआरपीएफ के डीजी कुलदीप सिंह - फोटो : Amar Ujala (File Photo)


स्थानीय पुलिस को डेपुटेशन पर सीएपीएफ में लाया जा सकता है। सीएपीएफ से भी अधिकारी राज्यों की पुलिस में कुछ समय के लिए जा सकते हैं। कई राज्यों में ड्यूटी के दौरान सीएपीएफ कमांडरों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं होता। एसएचओ को लगता है कि उनके पास सारी पावर है, इसी चक्कर में वे उसका दुरुपयोग कर बैठते हैं।


पूर्व आईजी गुरचरण सिंह ने कहा, कई साल पहले एक कमेटी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपी थी। उसमें अनेकों मुद्दों का जिक्र था, जिनमें कैडर अधिकारियों के प्रमोशन की बात भी शामिल थी। पहली कमेटी के चेयरमैन पूर्व डीजी एएस गिल थे और दूसरी कमेटी की अध्यक्षता खुद के. विजय कुमार कर रहे थे। कमेटी के अनेक सुझावों में से केवल एक बात मानी गई। बल को जोखिम वाले क्षेत्रों में एके47 राइफल मुहैया कराई गई। बाकी बातों का क्या रहा, इस सवाल पर डीजी कुलदीप ने कहा, वे एएस गिल कमेटी के गठन से वाकिफ नहीं हैं। इस बार के कैडर रिव्यू में अफसरों के सुझावों पर गौर किया गया है। रिपोर्ट में एमएचए से पद बढ़ाने की मांग की गई है। इससे कुछ हद तक पदोन्नति की समस्या दूर हो सकती है।

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