मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त परमबीर सिंह की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही है। सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति केयू चांदीवाल की अध्यक्षता वाले जांच आयोग ने परमबीर सिंह पर पेश नहीं होने के लिए 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया है।
परमबीर सिंह द्वारा पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच के लिए महाराष्ट्र सरकार द्वारा एकल सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। समिति ने परमबीर सिंह को अपने समक्ष पेश होने का 'आखिरी मौका' दिया है।
परमबीर सिंह की ओर से पेश अधिवक्ता संजय जैन और अनुकुल सेठ ने समिति को सूचित किया कि मुंबई के पूर्व शीर्ष पुलिस अधिकारी ने बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष एक याचिका दायर की है जिसमें 'समिति के अस्तित्व और समिति द्वारा भेजे गए सम्मन' को चुनौती दी गई है।
परमबीर सिंह के वकीलों ने यह कहते हुए समिति की सुनवाई स्थगित करने की मांग की कि उनकी याचिका पर 23 अगस्त को उच्च न्यायालय में सुनवाई होने की संभावना है। उन्होंने अनुरोध किया कि समिति की सुनवाई उसके बाद किसी भी तारीख के लिए स्थगित कर दी जाए। हालांकि, अन्य गवाहों की ओर से मौजूद अन्य अधिवक्ताओं ने सिंह के इस कदम का विरोध किया।
न्यायमूर्ति चांदीवाल ने कहा, 'अधिवक्ताओं को सुनने के बाद, यह स्पष्ट है कि जांच एक निर्धारित समय के भीतर पूरी की जानी है। हालांकि 30 जुलाई के आदेश पर देरी से सवाल उठाया गया है, इसके लिए जांच को सामान्य रूप से नहीं रोका जाना चाहिए।'
उन्होंने आगे कहा, 'अन्य पहलुओं और जांच के विकास को नजरअंदाज करते हुए, तथ्य यह है कि पार्टियों को समय सारिणी का पालन करना होगा।' आदेश में आगे लिखा गया है, 'आखिरी मौके के रूप में, मामले में 25 अगस्त को परमबीर सिंह समिति के सामने साक्ष्य रखें, साथ ही मुख्यमंत्री कोविड-19 राहत कोष में परमबीर सिंह द्वारा जुर्माना के रूप में 25,000 रुपये का भुगतान किया जाए।' सिंह को यह पैसा 18 अगस्त से तीन दिनों के भीतर जमा करना है।