मुंबई के मशहूर शिवाजी पार्क के आसपास की इमारतों में रहने वाले कई लोगों ने शुक्रवार को सीजेपी के आंदोलन का विरोध किया। यह आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर किया गया।
स्थानीय लोगों को किस बात पर आपत्ति?
स्थानीय लोगों ने कहा कि ऐसे आंदोलनों से शोर-शराबा बढ़ता है। लोगों को परेशानी होती है। रोजमर्रा के काम भी प्रभावित होते हैं। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों की भीड़ के कारण उन्हें अपनी दुकानें और अन्य प्रतिष्ठान बंद रखने पड़े।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन दोपहर करीब चार बजे शुरू हुआ। उस समय बहुत तेज धूप थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचे। हजारों लोग मशहूर शिवाजी पार्क के आसपास जमा हुए। प्रदर्शन के लिए पुलिस की अनुमति नहीं थी।
हालांकि, स्थानीय लोगों के विरोध पर कुछ लोगों ने व्यंग्य किया। इसकी एक वजह यह भी थी कि शिवाजी पार्क में कई वर्षों से बड़े राजनीतिक कार्यक्रम होते रहे हैं। इन कार्यक्रमों में लाखों लोग शामिल होते रहे हैं।
गीतकार जावेद अख्तर ने क्या कहा?
मशहूर पटकथा लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने एक्स पर एक पोस्ट किया। अख्तर ने कहा कि उन्हें खुशी है कि शिवाजी पार्क के कुछ निवासियों ने ध्वनि प्रदूषण पर चिंता जताई है। उन्होंने सीजेपी के प्रदर्शन को रद्द करने की मांग भी की है।
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हालांकि, इसके बाद अख्तर ने व्यंग्य किया। उन्होंने कहा कि उन्हें 'सौ प्रतिशत यकीन' है कि जब भी महाराष्ट्र की कोई राजनीतिक पार्टी शिवाजी पार्क में सार्वजनिक सभा करेगी, तब भी स्थानीय निवासी इसी आपत्ति को उठाएंगे। उन्होंने कहा कि उस समय भी आपत्ति उसी या उससे ज्यादा तीव्रता से उठाई जाएगी।
जावेद अख्तर की पत्नी और अभिनेत्री शबाना आजमी ने सीजेपी के प्रदर्शन में हिस्सा लिया। उन्होंने मंच से प्रदर्शन में शामिल लोगों को संबोधित भी किया।
29 सितंबर को क्या हुआ था?
इससे पहले 29 सितंबर को भी स्थानीय लोगों का विरोध सामने आया था। उस दिन एक समूह ने शिवाजी पार्क में सीजेपी के सदस्यों का सामना किया था। समूह ने उनसे जगह छोड़ने के लिए कहा था।
स्थानीय लोगों ने क्या कहा?
कुछ स्थानीय लोगों ने कहा कि उन्हें सीजेपी के कार्यक्रम से अपने आप में कोई आपत्ति नहीं है। उनकी आपत्ति प्रदर्शन करने के तरीके से है। साथ ही, वे आसपास के इलाके पर पड़ने वाले इसके असर को लेकर भी चिंतित हैं।
स्थानीय लोगों ने कहा कि नागरिकों को विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है। लेकिन उन्हें नियमों का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि भीड़ जमा होने और उससे पैदा होने वाली अव्यवस्था से आम लोगों को परेशानी होती है।