असम में बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग को लेकर शिवसागर के विधायक अखिल गोगोई ने शुक्रवार को विधानसभा परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। उन्होंने साफ कहा है कि जब तक राज्य सरकार उनकी मांगें नहीं मानती, तब तक उनका सत्याग्रह जारी रहेगा। गोगोई की मांग है कि बाढ़ से प्रभावित परिवारों को घोषित आर्थिक सहायता जल्द दी जाए और नुकसान झेलने वाले परिवारों को उचित मुआवजा मिले।
सरकार से क्या चाहते हैं अखिल गोगोई?
गोगोई ने असम के चार जिलों शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट के बाढ़ प्रभावित परिवारों को एकमुश्त अंतरिम सहायता के तौर पर 15,000 रुपये देने की मांग की है। इसके अलावा, शिवसागर और चराइदेव के प्रभावित परिवारों को 10,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता देने की मांग भी की गई है। गोगोई के मुताबिक, सरकार को इन परिवारों के लिए घोषित सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।
धरना खत्म करने के लिए अखिल गोगोई की क्या शर्त?
अखिल गोगोई ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि असम विधानसभा परिसर में उनका अनिश्चितकालीन सत्याग्रह तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार चार जिलों के बाढ़ पीड़ितों को 15,000 रुपये की अंतरिम सहायता और दो जिलों के प्रभावित लोगों को अतिरिक्त 10,000 रुपये देने की अपनी प्रतिबद्धता पूरी नहीं करती। उन्होंने चारों जिलों के प्रत्येक बाढ़ प्रभावित परिवार को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग भी की है। उनका कहना है कि सरकार के मांगें मानने तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा।
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सरकार पर राहत राशि नहीं बांटने का आरोप क्यों लगा?
अखिल गोगोई ने बृहस्पतिवार को गांधी जयंती के अवसर पर अनिश्चितकालीन आंदोलन की घोषणा की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि असम सरकार ने बाढ़ पीड़ितों के लिए जिस राहत राशि की घोषणा की थी, उसे बांटने में नाकाम रही है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को लिखे पत्र में उन्होंने बताया कि 23 सितंबर को एक सार्वजनिक सभा में प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता और दीर्घकालिक मुआवजा देने के लिए एक अक्तूबर की समयसीमा तय की गई थी।
अब तक कितनी राहत मिली और कितना नुकसान हुआ?
23 सितंबर को शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट के बाढ़ प्रभावित लोगों ने रायजोर दल के नेतृत्व में प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि बाढ़ आने के दो महीने बाद भी उन्हें पर्याप्त राहत और मुआवजा नहीं मिला है। गोगोई ने दावा किया कि चार जिलों में बाढ़ प्रभावित 30 से 40 प्रतिशत परिवारों को अब तक घोषित 15,000 रुपये की अंतरिम सहायता नहीं मिली है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल शिवसागर और चराइदेव में किसी भी प्रभावित निवासी को अतिरिक्त 10,000 रुपये की विशेष राहत नहीं मिली है। इस साल असम में बाढ़ के कारण कम से कम 108 लोगों की मौत हुई। बाढ़ से घरों, स्कूलों, सड़कों, तटबंधों, मवेशियों के बाड़ों, मत्स्य पालन केंद्रों और स्वास्थ्य केंद्रों को भी नुकसान पहुंचा।