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Karnataka: 'खत्म हो चुका जयमहल पैलेस होटल की जमीन को दिया गया ग्रीन बेल्ट का दर्जा', हाईकोर्ट की टिप्पणी

Tue, 26 Dec 2023 07:49 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू

सार

Karnataka: जयमहल पैलेस होटल बंगलूरू के उल्सूर होबली के ओबरपड गांव में स्थित है। इस संपत्ति को 1995 में अनुमोदित व्यापक विकास योजना 2011 (सीडीपी) में जयमहल मेन रोड के नए सर्वेक्षण के तहत नामित किया गया था। इसका स्वामित्व गोंडल के पूर्व शाही परिवार ज्योतिंद्र सिंहजी विक्रमसिंहजी के उत्तराधिकारियों के पास है।
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कर्नाटक हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कहा है कि जिस जमीन पर जयमहल पैलेस होटल खड़ा है, वह सार्वजनिक पार्कों और हरित स्थानों के लिए आरक्षित थी। अदालत ने माना कि 2007 के 'संशोधित मास्टर प्लान (आरएमपी)  के तहत इस जमीन का अधिग्रहण पांच साल के भीतर किया जाना था लेकिन यह तय समय पर नहीं किया गया। इसलिए 24 जून 2012 की मध्यरात्रि को यह स्थिति समाप्त हो गई थी। 

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यह संपत्ति बंगलूरू के उल्सूर होबली के ओबरपड गांव में स्थित है। इससे पहले इस संपत्ति को 1995 में अनुमोदित व्यापक विकास योजना 2011 (सीडीपी) में जयमहल मेन रोड के नए सर्वेक्षण के तहत नामित किया गया था। इसका स्वामित्व गोंडल के पूर्व शाही परिवार ज्योतिंद्र सिंहजी विक्रमसिंहजी के उत्तराधिकारियों के पास है। 

तय समय पर नहीं हुआ जमीन अधिग्रहण 
न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज ने महारानी कुमुद कुमारी और महाराजा हिमांशुसिंहजी की याचिका पर 15 दिसंबर को अपने फैसले में कहा, 'संशोधित मास्टर प्लान, 2015 जिसके तहत इस जमीन का इस्तेमाल पार्कों और हरित स्थलों, खेल/खेल के मैदानों, कब्रिस्तान/कब्रिस्तान के लिए होना था लेकिन तय समय के भीतर इसका अधिग्रहण नहीं किया गया।' उच्च न्यायालय ने कहा कि अधिग्रहण प्रक्रिया तय समय अवधि में पूरी नहीं की गई जिससे चूक हुई।

उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में क्या कहा
उच्च न्यायालय ने कहा, याचिकाकर्ताओं की जमीन को संशोधित मास्टर प्लान के तहत कर्नाटक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (केटीसीपी) अधिनियम की धारा 12 के उपखंड (1) के खंड (सी) में सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए नामित किया गया है। यह  25 जून 2007 को प्रभावी हुआ था। इसे 24 जून 2012 की मध्यरात्रि से समाप्त माना जाता है, क्योंकि केटीसीपी अधिनियम की धारा 69 की उपधारा (1) या उपधारा (2) में इस जमीन का कोई अधिग्रहण नहीं किया गया। इसे 2015 में दायर याचिका में उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी गई थी। उच्च न्यायालय ने हाल ही में अपना फैसला सुनाया है। 
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याचिका में क्या कहा गया था
याचिका में दावा किया गया कि वर्ष 2011 के  व्यापक विकास योजना में इस जमीन को आवासीय उद्देश्यों के लिए तय किया गया था। लेकिन 2007 में अनुमोदित आरएमपी 2015 में इसे बदल दिया गया और पार्कों और हरे-भरे स्थानों, खेल /खेल के मैदानों, कब्रिस्तान /क्रब्रिस्तान के प्रयोजनों के लिए आरक्षित किया गया, और ग्रीन बेल्ट/जोन के रूप में वर्गीकृत किया गयाथा। 
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