अंटार्कटिका के पेंग्विन्स की संख्या
- फोटो : istock
मार्च 2022 में अंटार्कटिका में असाधारण गर्मी का कारण वायुमंडलीय नदियां थी। यहां के बड़े हिस्से में तापमान सामान्य से 40 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर चला गया था, जो दुनिया में अब तक दर्ज की गई सबसे तीव्र लू थी। जबकि यहां का तापमान माइनस 40 से 50 डिग्री सेल्सियस रहता है। हाल में हुए वैश्विक शोध में इसका खुलासा हुआ है। टीम का नेतृत्व स्विस जलवायु विज्ञानी जोनाथन विले ने किया। अध्ययन में लू का असर भारत के 33 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र पर भी देखा गया था।
नेशनल ओशनिक एंड एटमोस्फियरिक एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार वायुमंडलीय नदियां वायुमंडल में जलवाष्प वाला वह क्षेत्र है जिसे आकाशीय नदियों के रूप में जाना जाता है। ये नदियां अधिकांश जल वाष्प को उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के बाहर ले जाती हैं। वायुमंडलीय नदियां आकार और ताकत में बहुत अलग-अलग हो सकती हैं। औसत वायुमंडलीय नदी मिसिसिपी नदी के मुहाने पर पानी के औसत प्रवाह के बराबर जल वाष्प की मात्रा ले जाती है।
असाधारण रूप से मजबूत वायुमंडलीय नदियां उस मात्रा से 15 गुना तक तीव्र हो सकती हैं। जब वायुमंडलीय नदियां जमीन से टकराती हैं तो वे अक्सर इस जलवाष्प को बारिश या बर्फ के रूप में छोड़ती हैं। इस चरम घटना का एक नया विश्लेषण जर्नल ऑफ क्लाइमेट में प्रकाशित किया गया है।
समुद्री बर्फ की मात्रा रिकॉर्ड रूप से कम हुई
शोधकर्ताओं के अनुसार इस चरम घटना के कारण तटीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सतह पिघल गई और समुद्री बर्फ की मात्रा रिकॉर्ड रूप से कम हो गई। इसके अलावा माना जाता है कि वायुमंडलीय नदी के पश्चिम में एक अतिरिक्त उष्णकटिबंधीय चक्रवात कांगर आइस शेल्फ के अंतिम पतन का कारण बना जो पहले से ही गंभीर रूप से अस्थिर था। पूर्वी अंटार्कटिका का कांगर बर्फ शेल्फ रोम के आकार का एक तैरता हुआ हिमखंड था।
दुर्लभ घटना
अध्ययनकर्ता डॉ. टॉम ब्रेसगर्डल के अनुसार दुनिया भर में अत्यधिक तापमान और चरम मौसम की घटनाएं बड़े अंतर से रिकॉर्ड तोड़ रही हैं। यह घटना100 साल में होने वाली एक दुर्लभ घटना मानी जाएगी।