सोमवार को काबुल से भारतीय वायुसेना के एक और विमान से 75 अफगानी सिख व हिंदू भारत पहुंच रहे हैं। ये गुरु ग्रंथ साहिब की तीन प्रतियां भी भारत ला रहे हैं। अफगानिस्तान पर तालिबानियों के कब्जे के बाद वहां फंंसे भारतीयों को निकालने का मिशन जल्द पूरा होने वाला है। सूत्रों के अनुसार आजकल में दो विमानों से अफगानिस्तान में बचे भारतीयों व सहयोगियों को वापस ले आया जाएगा। इसके बाद शुरू में असंभव नजर आ रहा यह मिशन पूरा हो जाएगा।
भारत सरकार के सूत्रों ने सोमवार को बताया कि अफगानिस्तान में करीब 200 भारतीय और अटके हुए हैं। इंडियन वर्ल्ड फोरम के प्रेसीडेंट पुनीत सिंह चंडोक ने बताया कि संगठन विदेश मंत्रालय व वायुसेना के साथ समन्वय कर रहा है। तालिबान ने 15 अगस्त् को काबुल पर कब्जा किया था। इसके साथ ही लग रहा था कि अब भारतीयों को वहां से निकालना मुश्किल होगा, लेकिन विदेश मंत्रालय ने बेहतर रणनीति के दम पर इस मिशन को पूरा करने में लगभग कामयाबी पा ली है।
केंद्रीय मंत्री पुरी ने दी यह जानकारी
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ट्वीट कर बताया कि वायुसेना के विमान से तीन गुरु ग्रंथ साहिब जी भी लाए जा रहे हैं। इस विमान में 46 अफगानी हिंदू व सिख व वहां फंसे कुछ अन्य भारतीयों को लाया जा रहा है। चंडोक के अनुसार विमान में 75 लोग सवार हैं।
दिल्ली लाए गए 146 यात्रियों में से दो कोरोना संक्रमित
इस बीच, रविवार देर रात से सोमवार अल सुबह तक चार विमानों से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट लाए गए 146 यात्रियों में से दो यात्री कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। उन्हें क्वारंटाइन किया गया है। एक संक्रमित मेघालय का व दूसरा आंध्र प्रदेश का रहने वाला है।
अब तक छह विमानों से वापसी
जल्द ही काबुल से दो और विमानों में से भारतीयों का लाया जाएगा। इसके बाद वहां से लाए गए कुल भारतीयों की संख्या 700 से ज्यादा हो जाएगी। 16 अगस्त से लेकर अब तक भारतीय वायुसेना और एअर इंडिया के कुल छह विमानों से काबुल से भारतीयों को लाया जा चुका है।
आसान नहीं थी वापसी, जयशंकर व एनएसए जुटे रहे
काबुल से भारतीयों को सुरक्षित निकालकर लाना आसान नहीं था। कूटनीतिक और सुरक्षा के स्तर पर कई रणनीतियों पर दांव-पेंच संभालने थे, जिसमें खुद सीधे तौर पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार व उनके विभाग के बड़े अधिकारी भी इसमें जुटे रहे।
इस तरह काबुल तक पहुंचे विमान
काबुल के हामिद करजई एयरपोर्ट तक भारतीय विमानों को पहुंचने के लिए पहले तुर्की की सेना और फिर तालिबान के घेरे को पार करके वहां पहुंचना पड़ा। काबुल एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद वहां मौजूद भीड़ से बचाते हुए अपने लोगों को सुरक्षित निकालना आसान नहीं था। तुर्की के सुरक्षाबलों की ओर से फायरिंग का भी सामना करना पड़ा। काबुल एयरपोर्ट पर भी अमेरिकी सेना बारीकी से प्रत्येक यात्री की जांच के बाद ही विमान में बैठने देने की इजाजत दे रही थी।