भारतीय संविधान के निर्माता का जिक्र आते ही डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का नाम हमारे जेहन में सबसे पहले आता है। निश्चित तौर पर ड्राफ्ट कमेटी के चेयरमैन होने के नाते बाबा साहेब ही हमारे संविधान के वास्तुकार थे। मगर क्या आप उस शख्स को जानते हैं, जिन्होंने कड़ी मेहनत कर पूरे संविधान को अपने हाथों से कागज पर उकेरा?
उनका नाम है प्रख्यात कैलिग्राफर (सुलेखक) प्रेम बिहारी नारायण रायजादा।
26 नवंबर, 1949 को भारतीय संविधान तैयार हुआ। कई लोगों के अथक परिश्रम का ही फल था कि संविधान की मूल प्रति किसी कलाकृति सी बनी। नंदलाल बोस और उनके छात्रों ने अपनी पेंटिंग से खूबसूरत बनाया, तो प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने अपनी लेखनी से इसमें चार चांद लगा दिए। उन्होंने अपनी कैलिग्राफी से संविधान की शुरुआती सामग्री और उसकी प्रस्तावना लिखी। रायजादा ने इटेलिक शैली में बेहद खूबसूरती से संविधान लिखा, जिसमें उन्होंने एक भी गलती नहीं की।
दादा से सीखी कैलिग्राफी
- प्रेम बिहारी के परिवार में कैलिग्राफी की परंपरा थी। कम उम्र माता-पिता को खो देने के बाद उनका पालन पोषण दादा जी और चाचा जी ने किया।
- उनके दादा मास्टर राम प्रसाद जी सक्सेना अच्छे कैलिग्राफर होने के साथ फारसी और अंग्रेजी के अच्छे जानकार थे। वह कई अंग्रेज अफसरों को भी फारसी सिखाते थे।
- प्रेम बिहारी जी ने कैलिग्राफी अपने दादाजी से ही सीखी।
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