विजयजदशमी के मौके पर आयोजित आरएसएस के वार्षिक आयोजन में मणिपुर में हिंसा भड़काने को लेकर संघ प्रमुख की टिप्पणी पर कुकी-जो समुदाय के संगठन इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (आईटीएलएफ) पलटवार किया है। आईटीएलएफ ने आरोप लगाया है कि मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने पूर्वोत्तर राज्य में जातीय संघर्ष को ‘भड़काया’ है।
आईटीएलएफ ने किए सवाल
साथ ही आईटीएलएफ ने पूछा कि वर्तमान सरकार के राज्य में मार्च 2017 से शासन शुरू करने से पहले दोनों पक्षों के बीच कोई झड़प क्यों नहीं हुई थी। इस दौरान, आईटीएलएफ ने मणिपुर की स्थिति पर भी कई सवाल भी किए जैसे कि हाल ही में अफ्स्पा को सिर्फ घाटी क्षेत्रों में क्यों हटाया गया, पहाड़ी जिलों में क्यों नहीं।
इस दौरान आईटीएलएफ ने यह सवाल भी किया कि भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत आरक्षित और संरक्षित वनों के संबंध में 1966 की सरकारी अधिसूचना अचानक 2023 में क्यों लागू की गई? आईटीएलएफ ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में मणिपुर ने जो देखा वह आदिवासियों को संविधान के तहत प्राप्त अधिकारों और सुरक्षा पर अत्यधिक समन्वित हमला था।
बता दें कि इससे पहले, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को दशहरा रैली में दिए अपने संबोधन में मणिपुर हिंसा पर बात की थी। उन्होंने कहा कि मणिपुर हिंसा सुनियोजित थी और उन्होंने बाहरी ताकतों पर उत्तर पूर्वी राज्य में हालात बिगाड़ने का आरोप लगाया। भागवत ने कहा कि मैती और कुकी लंबे समय से साथ मिलकर रह रहे हैं। आरएसएस प्रमुख ने सवाल करते हुए पूछा कि मणिपुर एक सीमावर्ती राज्य है और वहां अलगाव और आंतरिक संघर्ष से किसे फायदा होगा?
मणिपुर हिंसा में बाहरी ताकतों का हाथ?
भागवत ने मणिपुर के हालात पर कहा कि राज्य में जो हिंसा हुई है, उसे कराया गया है। विदेशी ताकतें इस अशांति और अलगाव का फायदा लेना चाहती हैं। भागवत ने सवाल किया कि क्या दक्षिण पूर्व एशिया की राजनीति का भी इसमें भूमिका हो सकती है? भागवत ने कहा कि 'जिन आरएसएस कार्यकर्ताओं ने मणिपुर में शांति स्थापित करने के लिए काम किया, उन पर हमें गर्व है।' उन्होंने कहा कि यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि केंद्र में मजबूत सरकार के होते हुए भी मणिपुर में लंबे समय तक दंगे की आग क्यों भड़कती रही। जो समाज वर्षों से एक दूसरे के साथ शांतिपूर्ण तरीके से रहते आए थे, वे अचानक एक दूसरे के विरुद्ध क्यों हो गए?