आरबीआई ने हाल ही में सोने के आभूषणों और गहनों के खिलाफ गिरवी रखे गए ऋणों की समीक्षा की। समीक्षा, के साथ ही चुनिंदा पर्यवेक्षित संस्थाओं की ऑनसाइट जांच के निष्कर्ष, कई अनियमित व्यवहारों की ओर संकेत करते हैं।
सोने के एवज में दिए जा रहे कर्ज में जमकर हेराफेरी हो रही है। भारतीय रिजर्व बैंक ने इसका संज्ञान लिया है। आरबीआई ने ऐसे बैंकों और वित्तीय संस्थानों से सीधे कहा है कि इस तरह की गतिविधियों पर कार्रवाई हो। साथ ही, नीतियों और कर्ज के पोर्टफोलियो की समीक्षा भी की जाए।
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भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने सोमवार को कहा, कई संस्थानों में अनियमितता को हमने देखा है। हमारी हालिया समीक्षा में सोने के आभूषणों को गिरवी रखकर लोन देने के संबंध में कई कमियां सामने आईं हैं।
इस प्रमुख कमियों में ऋणों की सोर्सिंग और मूल्यांकन के लिए तीसरे पक्ष के उपयोग में कमियां, ग्राहक की उपस्थिति के बिना सोने का मूल्यांकन, अपर्याप्त उचित परिश्रम और सोने के ऋणों की अंतिम-उपयोग निगरानी की कमी, ग्राहक की तरफ चूक किए जाने पर सोने के आभूषणों और गहनों की नीलामी के दौरान पारदर्शिता की कमी, मूल्य के लिए ऋण (LTV) की निगरानी में कमियां और जोखिम-भार का गलत अनुप्रयोग शामिल हैं।
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आरबीआई ने कहा कि सोने के ऋण पोर्टफोलियो की बारीकी से निगरानी की जानी चाहिए, विशेष रूप से कुछ संस्थाओं में पोर्टफोलियो में उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी के मद्देनजर। आरबीआई ने कहा, यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि आउटसोर्स की गई गतिविधियों और तीसरे पक्ष के सेवा प्रदाताओं पर पर्याप्त नियंत्रण हो। वहीं इस मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी तीन महीने के भीतर रिजर्व बैंक के वरिष्ठ पर्यवेक्षी प्रबंधक (एसएसएम) को दी जानी चाहिए। विनियामक दिशा-निर्देशों का कोई भी गैर-अनुपालन गंभीरता से लिया जाएगा और अन्य बातों के अलावा, पर्यवेक्षी कार्रवाई भी की जाएगी।