टाटा समूह के मुखिया रतन टाटा शीर्ष पर नेतृत्व के मुद्दे पर शून्यता छोड़ गए हैं। उन्होंने 13 लाख 85 हजार करोड़ रुपये के राजस्व वाले समूह का कोई उत्तराधिकारी नहीं बनाया है। ऐसे में नजरें उनके उत्तराधिकारी पर टिक गई हैं। खासकर, टाटा ट्रस्ट के मामले में, जिसके पास समूह की मूल कंपनी टाटा संस का 60 फीसदी से अधिक मालिकाना हक है।
नए मुखिया का चयन ट्रस्टी बोर्ड करेगा। यह भी हो सकता है कि एक अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किया जाए। उसके बाद स्थायी उत्तराधिकारी की तलाश की जाए। सूत्रों के मुताबिक, इसमें दो नाम आगे हैं। एक नोएल टाटा का। दूसरा साइरस मिस्त्री के परिवार से कोई व्यक्ति। नोएल रतन टाटा के सौतेले भाई और टाटा इंटरनेशनल के अध्यक्ष हैं। हालांकि कम सार्वजनिक प्रोफाइल व टाटा संस के साथ सीमित भागीदारी उनके खिलाफ भी हो सकती है। ऐसे में फिर साइरस मिस्त्री के उत्तराधिकारियों में से नेतृत्व की तलाश हो सकती है। 2012 में उत्तराधिकारी के रूप में मिस्त्री के चयन ने परिवार की परंपरा में अहम बदलाव को देखा, पर 2016 में उनके समूह से निकलने के बाद अस्थिरता पैदा हो गई थी।
टाटा और मिस्त्री परिवारों के बीच मतभेद दूर करने का अवसर भी नेतृत्व परिवर्तन
टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन टाटा और साइरस मिस्त्री परिवारों के बीच संघर्ष विराम का अनूठा अवसर है। दोनों परिवारों के रिश्ते साइरस मिस्त्री को 2016 में बाहर करने के बाद से ही तनावपूर्ण हैं। नए मुखिया के प्रबल दावेदार टाटा इंटरनेशनल के अध्यक्ष और रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल टाटा ने टाटा ट्रेंट और वोल्टास का भी सफलतापूर्वक नेतृत्व किया है। दूसरी ओर, पिछली बार के खराब अनुभव के बावजूद साइरस के उत्तराधिकारियों में से भी नए मुखिया की तलाश की जा सकती है। चाहे नोएल टाटा जैसा परिवार का कोई सदस्य बागडोर संभाले, या ट्रस्टी बाहरी प्रतिभा को चुनें, यह निर्णय आने वाले वर्षों के लिए समूह की दिशा को आकार देगा।
सुलह में अहम भूमिका निभा सकता है पल्लोनजी समूह
टाटा संस में 18.37 फीसदी हिस्सा रखने वाले शापूरजी पल्लोनजी समूह का आज भी टाटा समूह में प्रभाव है। हालांिक, टाटा ट्रस्ट के अगले प्रमुख के चयन में उनकी प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं होगी, लेकिन उनकी हिस्सेदारी उन्हें बोर्डरूम निर्णयों में पर्याप्त जगह देगी।