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वेबिनार: औषधीय पौधों से कोविड का उपचार, रंजीत पुराणिक ने कहा- आयुर्वेद में कोई रहस्य नहीं

Wed, 16 Jun 2021 06:05 PM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • आयुष मंत्रालय के संग अमर उजाला चला रहा है पांच दिन का जागरूकता अभियान
  • अमर उजाला के फेसबुक पेज व यूट्यूब चैनल पर सीधा प्रसारण देखें प्रतिदिन शाम 5 बजे से
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रंजीत पुराणिक - फोटो : यूट्यूब स्क्रीनग्रैब
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विस्तार
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कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में पिछले दिनों ऑक्सीजन और अस्पताल के लिए मची दौड़ ने कई राज्यों में एक तरह से अफरा-तफरी का माहौल बना दिया। ऐसे हालात से किसी को न गुजरना पड़े और हर कोई जागरूक बने, इसके लिए आयुष मंत्रालय और राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ के संग मिलकर अमर उजाला आज से पांच दिन तक रोजाना खास वेबिनार आयोजित करने जा रहा है। इसमें जाने माने विशेषज्ञ कोविड-19 के उपचार में आयुर्वेद के महत्व को समझाएंगे। 14 से 18 जून तक प्रतिदिन शाम 5 बजे से होने वाले इस वेबिनार का अमर उजाला के फेसबुक पेज और यूट्यूब चैनल पर सीधा प्रसारण किया जाएगा।

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कोविड-19 के उपचार में आयुर्वेद किस तरह फायदेमंद हो सकता है, किस तरह इसे अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है, इसे लेकर लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से इस वेबिनार का आयोजन किया जा रहा है। 'सेहत है संग तो जीतेंगे हर जंग' के ध्येय वाक्य के साथ हो रही वेबिनार में बुधवार यानी 16 जून को श्री धूतापापेश्वर लिमिटेड के प्रबंध निदेशक रंजीत पुराणिक आयुर्वेद उद्योग में औषधीय पौधों की खपत के बारे में जानकारी दे रहे हैं। इस वेबिनार में शामिल होने के लिए अमर उजाला के फेसबुक पेज और यूट्यूब चैनल पर क्लिक करें और पेज को लाइक, शेयर तथा सब्सक्राइब जरूर करें।

क्या बोले रंजीत पुराणिक

  • जब से आयुर्वेद को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स के दायरे में आया और इसके मानकीकरण की मुहिम चलाई गई, लोगों में आयुर्वेद को लेकर जागरूकता बढ़ी है।
  • आयुर्वेद के क्षेत्र में उद्यमिता शुरू करने के लिए व्यक्ति के अंदर थोड़ा सा सेवा भाव होना बहुत जरूरी है। अगर ऐसा हो जाए तो बहुत अच्छा हो सकता है।
  • आयुर्वेद में कोई रहस्य नहीं है। एलोपैथी में दवाओं के पेटेंट की समस्या आती है। आयुर्वेद में ऐसा नहीं है। इसीलिए इसे सेवाभाव की चिकित्सा कहा जाता है।
  • आज आयुर्वेद उद्योग 30 हजार करोड़ का है। आने वाले समय में यह और बढ़ने वाला है। खास बात ये है कि यह किसी भी आर्थिक मॉडल में चल सकता है। 
  • देश में वर्तमान में आयुर्वेदिक दवा उद्योग में आठ हजार उत्पादक हैं और आने वाले समय में करीब 10 हजार और उत्पादक इस क्षेत्र में आने वाले हैं।
  • अश्वगंधा, गिलोय, च्यवनप्राश, तुलसी, पिंपली जैसी औषधियां मनुष्य के स्वास्थ्य और प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

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