जवाहर बाग हिंसा के सूत्रधार रामवृक्ष यादव ने बड़े सियासी संबंध स्थापित कर लिए थे। यूपी ही नहीं कई राज्यों की सियासी हस्तियों से उसके रिश्ते थे। उसके बुलावे पर कई मंत्री और नेता जवाहर बाग में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। खास बात यह है कि इन मंत्रियों की अगुवाई अधिकारियों ने ही की थी। इस संबंध में न्यायिक आयोग को भी शपथ पत्र दिए गए हैं।
ढाई साल तक जवाहर बाग पर कब्जा जमाने वाले रामवृक्ष यादव की जड़ें बहुत गहरी थीं। उसने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक अपने संबंध स्थापित कर रखे थे। अगर ऐसा नहीं होता तो अधिकारियों ने उसे आने के साथ ही जवाहर बाग से निकाल कर बाहर कर दिया होता। लेकिन किसी अधिकारी की हिम्मत नहीं हुई जो रामवृक्ष यादव के खिलाफ कोई एक्शन ले पाता।
उसने थोड़ा-थोड़ा करके पूरे बाग पर कब्जा कर लिया था। उद्यान विभाग के आफिस से लेकर जिला उद्यान अधिकारी तक के कार्यालय को अपना ठिकाना बना लिया था। प्रशासन नोटिस तो जारी करता रहा मगर जवाहर बाग में घुसकर कार्रवाई करने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पाया। जबकि मार्च, 2014 में जब रामवृक्ष यहां आया था तब उसके साथ मुश्किल से दो सौ से तीन सौ लोग ही रहे होंगे।