रामसर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त आद्रभूमियों में चार और स्थल पहचाने गए हैं। इन्हें भी रामसर सचिवालय की ओर से रामसर स्थल के रूप में मान्यता दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि देश के लिए यह गौरव का विषय है।
पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान में बताया गया कि गुजरात के थोल, वधावन व हरियाणा के सुल्तानपुर और भिंडावास शामिल हैं। इन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर महत्व की वेटलैंड माना गया है। इसलिए इन्हें अंतरराष्ट्रीय वेटलैंड्स की सूची में शामिल किया गया है।
क्या है रामसर संधि
रामसर स्थल वे आद्रभूमियां हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय महत्व प्राप्त है। 1971 में ईरान के रामसर शहर में विश्व की आद्रभूमियों के स्थाई उपयोग व संरक्षण के लिए यूनेस्को के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह संधि 1975 से अस्तित्व में आई। इसे रामसर संधि भी कहा जाता है। इसकी सूची में विश्व की प्रमुख वेटलैंड्स को शामिल किया गया है।
क्या होते हैं वेटलैंड
नमी या दलदली भूमि वाले क्षेत्र को आर्द्रभूमि या वेटलैंड कहा जाता है। ये वो क्षेत्र होते हैं जहां भरपूर नमी पाई जाती है। इसके कई लाभ हैं। यह पानी को प्रदूषण मुक्त बनाती है। यह वह क्षेत्र होते हैं, जहां वर्ष भर आंशिक रूप से या पूर्णतः पानी भरा रहता है। भारत में आर्द्रभूमि ठंडे और शुष्क इलाकों से लेकर मध्य भारत के कटिबंधीय मानसूनी इलाकों और दक्षिण के नमी वाले इलाकों तक फैली हुई है।