राष्ट्रीय शिक्षा शोध व प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने मंगलवार को इंडियन साइन लेंग्वेज रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर (आईएसएलआरटीसी) के साथ एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए। अब एनसीईआरटी मूकबधिर बच्चों के लिए भी अपनी किताबें व अन्य शैक्षिक उत्पाद सांकेतिक भाषा (साइन लेंग्वेज) में उपलब्ध करा पाएगी। एमओयू के दौरान केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और केंद्रीय सामाजिक न्याय व सशक्तीकरण मंत्री थावर चंद गहलोत भी मौजूद रहे।
गहलोत ने बताया कि भारतीय सांकेतिक भाषा (आईएसएल) में एनसीईआरटी किताबों की उपलब्धता से सुनने की क्षमता नहीं रखने वाले बच्चे भी अब शैक्षिक संसाधनों का लाभ ले पाएंगे। यह शिक्षकों, शिक्षक प्रशिक्षकों, अभिभावकों और बधिर समुदाय के लिए बेहद उपयोगी व आवश्यक संसाधन साबित होगा। मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, बच्चे की ज्ञान संबंधी योग्यता बचपन में ही विकसित होती है और यह बेहद आवश्यक है कि उन्हें सीखने की जरूरत के हिसाब से शैक्षिक मैटीरियल उपलब्ध कराया जाए।
सचिव शकुंतला गामलिन ने कहा, अब तक बधिर बच्चे केवल मौखिक या लिखित माध्यम से ही पढ़ सकते थे, लेकिन इस एमओयू पर हस्ताक्षर होने के बाद वे भारतीय सांकेतिक भाषा के जरिये भी पढ़ाई कर पाएंगे। इससे न केवल उनके शब्दकोश में बढ़ोतरी होगी, बल्कि उनकी समझने की क्षमता को भी बढ़ावा मिलेगा।