राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जबरन धर्मांतरण का विरोध करने पर रामलिंगम की नृशंस हत्या से संबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) साजिश मामले में रविवार को तमिलनाडु में 21 स्थानों पर पांच भगोड़े घोषित अपराधियों और संदिग्धों के घरों पर छापेमारी की।
एनआईए की एक विज्ञप्ति में कहा गया है, रामलिंगम हत्याकांड पीएफआई साजिश मामले में राज्यव्यापी छापेमारी पीएफआई के कई पदाधिकारियों के आवासीय परिसरों पर की गईं। इसमें नेल्लई मुबारक (Nellai Mubarak) का घर भी शामिल है। नेल्लई सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के तमिलनाडु इकाई का अध्यक्ष है। बता दें कि रामलिंगम ने कथित तौर पर हिंदुओं को इस्लाम में परिवर्तित करने में शामिल पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के नेताओं के दावाह (Dawah) कार्य का विरोध किया था। जिसके बाद 2019 में उनकी हत्या कर दी गई थी।
भगोड़े अपराधियों की सूचना देने वालों को मिलेगा पांच-पांच लाख का इनाम
विज्ञप्ति में कहा गया है कि जिन अन्य लोगों के घरों पर छापेमारी की गई उनमें भगोड़ा घोषित अपराधी मोहम्मद अली जिन्ना, अब्दुल मजीथ, भुरखानुद्दीन, शाहुल हमीद और नफील हसन शामिल है। एनआईए ने पांचों भगोड़े अपराधियों में से किसी की गिरफ्तारी के लिए सूचना देने वाले को पांच-पांच लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की है। मामले में पहले से गिरफ्तार अन्य लोगों के खिलाफ फिलहाल मुकदमा चल रहा है।
इससे पहले एनआईए ने दो अगस्त, 2019 को विशेष अदालत, चेन्नई के समक्ष पांच फरार आरोपियों सहित 18 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था। इसके बाद एनआईए की विशेष अदालत ने इन पांचों फरार आरोपियों को भगोड़ा अपराधी घोषित कर दिया था।
डिजिटल डिवाइस और दस्तावेज जब्त
एनआईए ने कहा, तंजावुर, मदुरै, तिरुनेलवेली, तिरुपुर, विल्लुपुरम, त्रिची, पुदुकोट्टई, कोयंबटूर और मयिलादुथुराई जिलों में रविवार को की गई छापेमारी में कई डिजिटल डिवाइस (मोबाइल फोन, सिम कार्ड और मेमोरी कार्ड) और दस्तावेज जब्त किए गए।
रामलिंगम की पांच फरवरी, 2019 को तंजावुर के पाकु विनायकम थोप्पू में पीएफआई के सदस्यों और पदाधिकारियों द्वारा बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। पीएपआई ने ही हत्या की साजिश रची थी। आरोपी व्यक्तियों ने अत्यंत हिंसक जिहादी तरीके से रामलिंगम की हत्या करके बदला लिया था, क्योंकि उन्होंने अरिवागम, थेनी (अब यूएपीए-1967 की धारा 25 के तहत आतंकवाद की आय के रूप में संलग्न) से भेजी गई दावाह या धर्मांतरण टीम द्वारा वंचित व्यक्तियों के जबरन धर्म परिवर्तन पर आपत्ति जताई थी।
एनआईए की जांच के अनुसार, पीएफआई के विरोधियों के बीच डर पैदा करने और सांप्रदायिक घृणा और हिंसा भड़काकर समुदायों के बीच दरार पैदा करने के लिए हिंसा भड़काई गई थी। गौरतलब है कि 28 सितंबर 2022 को भारत सरकार ने यूएपीए के तहत पीएफआई को एक 'गैरकानूनी संगठन' घोषित कर दिया है।