राम नाथ कोविंद को राजग का राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाने से बेशक भाजपा के धुरंधर नेताओं के मन में मायूसी छलकी है। मगर पीएम मोदी और अमित शाह ने कोविंद के जरिए यूपी की सियासी जमीन बचाए रखने की चाल चली है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिले 280 सीटों में से एक चौथाई सीटे महज यूपी से मिली थी।
मोदी लहर में पार्टी ने 70 से ज्यादा लोकसभा सीटें जीत कर सबको चौंका दिया था। अब 2019 में मोदी की दोबारा से ताजपोशी के प्रयास में भी भाजपा की नजर यूपी पर ही है। पार्टी अपने आधार को हर हाल में बचाए रखना चाहती हैै। यही वजह है कि पार्टी के दिग्गज नेताओं को दरकिनार कर भाजपा ने कोविंद के रूप में दलित कार्ड खेला है।
2019 की चुनौती के मद्देनजर भाजपा यूपी में दलित बिरादरी को हर हाल में साधना चाहती है। यही वजह है कि पार्टी ने राम नाथ कोविंद को अपना राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया है। ताकि सूबे के दलित मतों को संदेश दे सके। पार्टी को लगता है कि मायावती और अखिलेश यादव के एकजूट होने से यूपी में उसकी स्थिति उल्ट हो सकती है। इसलिए भाजपा ने मायावती के मूल वोट में सेंधमारी का बडा दांव चल दिया है।