राम मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम के कारण इस साल पूरे देश में भगवा झंडों की रिकॉर्ड बिक्री हुई है। पूरे देश में लोगों ने खूब बढ़चढ़कर भगवा झंडे खरीदे और इसे अपने घरों, वाहनों और कार्यालयों पर लगाया। भगवा झंडों की मांग इतनी ज्यादा थी कि उद्घाटन का दिन आते-आते देश के ज्यादातर हिस्सों में झंडों की कमी हो गई और हर झंडे को दो गुना से पांच गुना तक ज्यादा कीमत पर बेचा गया। जबकि इसी दौरान गणतंत्र दिवस पर तिरंगा झंडे की बिक्री में रिकॉर्ड कमी देखी गई। हर साल 26 जनवरी पर भारी संख्या में तिरंगे झंडे बिकते थे, लेकिन इस साल लोगों ने भगवा झंडों की खरीद ज्यादा की।
करोल बाग में झंडे और चुनाव सामग्री की थोक बिक्री करने वाले व्यापारी प्रवीण कुमार शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि इस वर्ष भगवा झंडों की रिकॉर्ड बिक्री हुई है। उनकी तरह ज्यादातर व्यापारियों को अनुमान था कि राम मंदिर उद्घाटन के कारण 22 जनवरी के आसपास भगवा झंडों की मांग में तेजी रह सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए सामान्य मांग की तुलना में दो से तीन गुना तक ज्यादा झंडे बनवाए गए थे।
प्रवीण कुमार शर्मा ने बताया कि उनके लिए यह आश्चर्य का विषय था कि 10 जनवरी आते-आते ही उनके सभी भगवा झंडे बिक चुके थे। भारी मांग को देखते हुए आनन-फानन में अतिरिक्त कारीगर लगाकर भगवा झंडे बनवाए गए, लेकिन यह भी मांग पूरा करने में सफल नहीं हुआ। इसका परिणाम हुआ कि भगवा झंडों की खूब ब्लैक मार्केटिंग हुई।
सदर बाजार थोक बाजार के लिए पूरे देश में जाना जाता है। सदर बाजार में जो झंडा थोक के रेट में 8000 रुपये प्रति बंडल (80 रुपये में एक) की कीमत पर उपलब्ध हो रहा था, उसकी कीमतें बढ़कर 15,000 रुपये तक हो गईं। 20 रुपये से लेकर 600 रुपये तक के सभी झंडों की कीमत में दो गुना से लेकर पांच गुना तक की बढ़ोतरी हो गई थी। यही हाल गांधी नगर, करोलबाग, सदर बाजार और चांदनी चौक तक था।
तिरंगे के बंडल नहीं खुले
26 जनवरी के आसपास तिरंगे झंडे की तेज बिक्री हर साल होती है। लोग इसे अपने घरों-कार्यालयों और वाहनों पर लगाने के लिए खूब खरीदते हैं। लेकिन इस बार तिरंगे की जगह भगवा झंडों ने ले ली। ज्यादातर लोगों ने आज भी अपने घरों पर भगवा झंडा लगा रखा है, जबकि इसी दौरान बिकने वाले तिरंगे झंडे बहुत कम बिके। आज भी हर कॉलोनी में लोगों के घरों-कार्यालयों और वाहनों पर भगवा झंडे लहराते हुए दिखाई पड़ रहे हैं।
कई व्यापारियों का कहना है कि इस बार 26 जनवरी को तिरंगे की मांग बहुत कम रही। तिरंगे झंडे के कई बंडल अब तक नहीं खुले, जबकि राष्ट्रीय कार्यक्रमों का यह दौर लगभग समाप्त होने जा रहा है। अब यह माल निकालने के लिए उन्हें आगामी चुनावों तक प्रतीक्षा करनी पड़ेगी।व्यापारियों को उम्मीद है कि हर साल 22 जनवरी को जब राम मंदिर निर्माण की वर्षगांठ मनाई जाएगी तब-तब भगवा झंडे की मांग में तेजी आएगी।