राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने शुक्रवार को राम मंदिर के दानपात्र से कथित चोरी और चंदे में वित्तीय अनियमितताओं के मामले पर RSS सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सरकार्यवाह की बात देशभर के करोड़ों स्वयंसेवकों और रामभक्तों की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करती है। साथ ही उन्होंने राजनीतिक दलों से इस मामले का राजनीतिकरण न करने की अपील करते हुए कहा कि सरकार, संगठन और ट्रस्ट निष्पक्ष तरीके से न्याय करेंगे और सभी को जांच पर भरोसा रखना चाहिए।
क्या सरकार और ट्रस्ट किसी के साथ भेदभाव करेंगे?
इस सवाल के जवाब में इंद्रेश कुमार ने कहा कि सरकार, संगठन और ट्रस्ट के लिए कोई अपना या पराया नहीं होता। संघ हमेशा से सभी के लिए समान न्याय की बात करता आया है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होगी और जो भी सच होगा, वही सामने आएगा।
क्या दानपात्र से हुई चोरी ने करोड़ों रामभक्तों की आस्था को चोट पहुंचाई?
इससे पहले RSS सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा था कि अयोध्या स्थित श्रीरामलला मंदिर के दानपात्र से हुई चोरी की घटना ने देशभर के रामभक्तों की भावनाओं और आस्था को गहरी ठेस पहुंचाई है। उन्होंने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताते हुए कहा कि पूरा समाज इससे आहत है।
क्या दोषियों को मिलेगी कड़ी सजा?
होसबोले ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। SIT की सिफारिशों के आधार पर कानूनी कार्रवाई शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
क्या मंदिर प्रबंधन में बड़े सुधार किए जाएंगे?
RSS सरकार्यवाह ने कहा कि इस घटना को एक असाधारण मामला मानते हुए मंदिर की वित्तीय व्यवस्था, प्रबंधन और कार्यप्रणाली की सभी कमियों को दूर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रभावी और गंभीर कदम उठाना जरूरी है ताकि अयोध्या आने वाले लाखों श्रद्धालुओं का विश्वास और आस्था पहले की तरह मजबूत बनी रहे।
क्या बेहतर व्यवस्था से श्रद्धालुओं का भरोसा और मजबूत होगा?
होसबोले ने विश्वास जताया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बेहतर वित्तीय प्रबंधन, पारदर्शी व्यवस्था और सुचारु प्रशासन के जरिए श्रद्धालुओं का भरोसा और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट से पूरे हिंदू समाज की यही अपेक्षा है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
क्या तिब्बत पर चीन का नया कानून चिंता बढ़ाने वाला है?
राम मंदिर मामले पर अपनी बात रखने के साथ ही इंद्रेश कुमार ने तिब्बत में चीन के 'एथनिक यूनिटी एंड प्रोग्रेस प्रमोशन लॉ' की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि तिब्बत कभी चीन का अभिन्न हिस्सा नहीं रहा और वहां की संस्कृति, शिक्षा तथा पहचान पर किसी भी तरह का हमला अमानवीय और असंवैधानिक है।
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क्या बातचीत से सुलझ सकता है तिब्बत विवाद?
इंद्रेश कुमार ने चीन से अपील की कि वह निर्वासित तिब्बती सरकार और तिब्बती नेतृत्व के साथ बातचीत कर विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकाले। उन्होंने कहा कि हाल ही में लागू 62 धाराओं वाले इस कानून को लेकर दुनिया भर में चिंता है। आलोचकों का मानना है कि इससे तिब्बत समेत जातीय अल्पसंख्यक क्षेत्रों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ेगा और उनकी संस्कृति, पहचान तथा अधिकारों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।