राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव में 55 सीटों पर चुनाव कराया जाना था। हालांकि इनमें से 37 उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए जबकि 18 सीटों पर मतदान के जरिए फैसला होगा। मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, झारखंड, आंध्र प्रदेश, मणिपुर और मेघालय में ये सीटें हैं। इनमें से ज्यादातर राज्यों में लॉकडाउन है। राजस्थान के जयपुर, उदयपुर और भीलवाड़ा जैसे शहरों में कोरोना के मरीजों की बढ़ती संख्या के चलते पूरा प्रदेश लॉकडाउन की स्थिति में है।
चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, ऐसे में इन राज्यों में चुनाव करा पाना कठिन है। खासतौर पर जब संसद के दोनों सदनों से लेकर हाईकोर्ट और सरकारी दफ्तर तक बंद कर दिए गए हैं। इनमें से अधिकतर राज्यों में धारा 144 लगी होने की वजह से एक स्थान पर पांच लोगों से ज्यादा के एकत्र होने पर रोक लगी है। हालांकि आयोग ने अभी तक चुनाव के स्थगित होने की आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं की है।
गुजरात, झारखंड, राजस्थान और मध्य प्रदेश में दिलचस्प होंगे चुनाव
गुजरात की चार राज्यसभा सीट में से भाजपा और कांग्रेस को संख्या बल के अनुसार 2-2 मिलनी चाहिए लेकिन भाजपा ने नरहरि अमीन के रूप में पांचवां उम्मीदवार उतारकर कांग्रेस के दूसरे उम्मीदवार की जीत की राह में रोड़े खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस के पांच विधायकों द्वारा इस्तीफा देने से उसकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इसी तरह मध्य प्रदेश की 3 सीटों पर चार उम्मीदवार खड़े हैं। कांग्रेस के 22 विधायकों के इस्तीफे के चलते कांग्रेस के एक उम्मीदवार का जीत पाना यहां भी मुश्किल होगा।
राजस्थान की 3 सीटों पर भी चार उम्मीदवार उतरने से कांग्रेस के दूसरे उम्मीदवार की जीत की संभावनाओं पर ग्रहण लग सकता है। वहीं झारखंड में 2 सीटों के लिए 3 उम्मीदवार हैं। यहां भाजपा तो अपनी सीट आसानी से जीत जाएगी लेकिन दूसरी सीट के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन के घटक झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस दोनों ने अपने अपने उम्मीदवार उतारे हैं।
गुजरात, हरियाणा में कांग्रेस विधायकों ने की थी क्रॉस वोटिंग
गुजरात में 2017 में हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के सात विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग करने से पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल हारते हारते बचे थे। इससे पहले भी 2016 में हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस विधायकों द्वारा गलत इंक के प्रयोग से उनके आधा दर्जन से अधिक विधायकों के मत रद्द कर दिए गए और बतौर निर्दलीय उम्मीदवार उतरे जी टीवी के मालिक सुभाष चंद्रा आसानी से जीत गए थे।