कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) से पीड़ित लोग भी ड्राइविंग लाइसेंस ले सकेंगे। सरकार ने रंगों की पहचान न कर पाने वाले लोगों को भी ड्राइविंग लाइसेंस देने की अधिसूचना जारी की है। इसके अनुसार, एक खास सीमा तक यानी आंशिक कलर ब्लाइंडनेस की स्थिति में लाइसेंस दिया जा सकता है। हालांकि, आवेदन देने वाले को इसके लिए प्रमाणपत्र देना होगा कि वह पूरी तरह कलर ब्लाइंड नहीं है।
मंत्रालय के सूत्रों ने सोमवार को बताया कि इस तरह के लोग वाहन चलाने संबंधी सारे काम आसानी से करने में करने में सक्षम हैं। ऐसे लोग सिर्फ रंगों की पहचान नहीं कर सकते हैं और इस आधार पर उसकी पूरी क्षमता को नकारा नही जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मामले में चिकित्सा विशेषज्ञों से विचार विमर्श किया है और इस मुद्दे पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया गया और नियमों में बदलाव का निर्णय लिया गया है। उनका कहना था कि दुनिया के कई देशों में कलर ब्लाइंड को ड्राइविंग लाइसेंस दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध ने 16 मार्च को नियमों में संशोधन को लेकर अधिसूचना जारी की गई है और लोगो से उस पर परामर्श मांगा गया है।