राजस्थान में कांग्रेसी विधायकों की बाड़ेबंदी का गुरुवार को अंतिम दिन है। गुरुवार शाम को ही राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सभी विधायकों को लेकर राजधानी जयपुर के लिए रवाना होंगे। सभी विधायकों को एक साथ जयपुर लाने के लिए कांग्रेस ने दिल्ली से बड़ा बोइंग जेट प्लेन उदयपुर मंगवाया है। प्लेन में सभी विधायक एक साथ बैठकर राजधानी पहुंचेंगे। हालांकि अभी तक विधायकों के मन में वोटिंग को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कांग्रेसी खेमे में शामिल विधायकों को अभी तक यह नहीं पता है कि किस उम्मीदवार को वोट देना है। दरअसल, पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति के तहत इस सस्पेंस को भी बरकरार रखा है। सभी विधायकों को मतदान की कतार में ही बताया जाएगा कि प्रत्याशी नंबर एक, दो और तीन कौन हैं।
इधर, बीटीपी ने कांग्रेस पार्टी की चिंता को बढ़ा दिया है। पार्टी ने अपने दो विधायकों को राज्यसभा चुनाव में शामिल नहीं होने के लिए व्हिप जारी कर दी है। ऐसे में कांग्रेस का गणित 126 से 123 पर आ गया है। निर्दलीय विधायक बलजीत यादव की स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है। हालांकि, बलजीत यादव उदयपुर में कांग्रेस की बाड़ेबंदी में शामिल हुए हैं। शेष तीन बचे विधायकों पर किरोड़ी फैक्टर हावी होने की चर्चाएं तेजी से चल रही हैं। इनमें निर्दलीय विधायक भी बताए जा रहे हैं। विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के हिसाब से भाजपा एक सीट पर जीत रही है। दूसरी सीट पर जीत दर्ज करने के लिए पार्टी को 11 वोट चाहिए।
राज्य में भाजपा के 71 विधायक हैं। एक सीट जीतने के लिए पार्टी को 41 विधायकों के वोटों की जरूरत होती है। दो उम्मीदवारों के लिए 82 वोट चाहिए। भाजपा समर्थक दूसरे उम्मीदवार सुभाष चंद्रा को आरएलपी के समर्थन के बाद सुभाष चंद्रा को आठ वोट चाहिए। कांग्रेस के रणनीतिकार कांग्रेस के 108, 13 निर्दलीय, एक आरएलडी, दो सीपीएम और दो बीटीपी विधायकों को मिलाकर 126 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहे थे। कांग्रेस चुनावों में कांग्रेस चार में से तीन सीटें जीतने को लेकर आश्वस्त हैं। कांग्रेस को तीसरी सीट के लिए निर्दलीय विधायकों की जरूरत पड़ेगी। 13 निर्दलीय विधायक गहलोत सरकार को समर्थन दे रहे हैं। भाजपा नेताओं को उम्मीद है कि गहलोत कैबिनेट में जगह नहीं मिलने से नाराज चल रहे निर्दलीय विधायकों का समर्थन मिल सकता है।