सभापति ने सांसद मोपी देवी, सांसद व प्रोफेसर मनोज झा और सांसद इमरान प्रतापगढ़ी व अन्य सदस्यों को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी। इसके बाद कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी और उनसे गुरु दक्षिणा मांगी।
संसद का मानसून सत्र इन दिनों काफी हंगामे से गुजर रहा है। राज्यसभा और लोकसभा में सरकार और विपक्ष दोनों अपने-अपने मुद्दों को लेकर आमने-सामने हैं। विपक्ष मणिपुर हिंसा को लेकर हंगामा कर रहा है तो सरकार पक्ष राजस्थान घटना को लेकर सवाल उठा रहा है। लेकिन इस तनातनी के बीच कुछ अच्छे पल भी राज्यसभा में देखने को मिले। दरअसल आज कुछ राज्यसभा सांसदों को जन्मदिन था, जिसको लेकर सभापति जगदीप धनखड़ ने शुक्रवारको सबको जन्मदिन की शुभकामनाएं दी।
विज्ञापन
जब धनखड़ ने मांगी गुरु दक्षिणा
सभापति ने सांसद मोपी देवी, सांसद व प्रोफेसर मनोज झा और सांसद इमरान प्रतापगढ़ी व अन्य सदस्यों को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी। इसके बाद कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी और उनसे गुरु दक्षिणा मांगी। उन्होंने कहा कि मेव कॉलेज अजमेर में दीपेंद्र सिंह हुड्डा मेरे जूनियर थे और इस लिहाज से मैं, उनका गुरु रह चुका हूं। ऐसे में, आज मैं उनसे गुरु दक्षिणा लूंगा। तभी सदन ठहाकों से गूंज उठा।
मनोज झा की बेटियों के बारे में बताया
इसके बाद सभापति धनखड़ ने कहा कि आज शाम होने तक दीपेंद्र हुडा बतौर गुरु दक्षिणा मेरी ओर से प्रोफेसर मनोज झा को अपनी जेब से कुछ भेंट करेंगे, इसका अनुपालन सुशील कुमार गुप्ता (आप) द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा। इसके बाद सभी लोग हंस पड़े। वहीं जगदीप धनखड़ ने प्रोफेसर मनोज कुमार झा को जन्मदिन की बधाई देते हुए कहा कि वो साल 2018 से सदन के सदस्य हैं, सोशल वर्क में डॉक्टरेट झा की दो बेटियां हैं और डॉटर्स क्लब के मेंबर भी है।
विज्ञापन
नारेबाजी हुई तो सभापति ने रोका
इससे पहले जब सभापति धनखड़ मोपीदेवी को जन्मदिन की बधाई दे रहे थे तो सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने राजस्थान और मणिपुर मुद्दे पर नारेबाजी की। तब उन्होंने कहा कि क्या हम अपने सदस्यों को जन्मदिन की बधाई नहीं दे सकते, सदन को व्यवस्थित नहीं रख सकते, ये अच्छी बात नहीं है। इसके बाद नारेबाजी बंद हो गई और सदन ने तीनों राज्यसभा सांसदों को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं।
विपक्ष ने मणिपुर हिंसा पर चर्चा पर जोर दिया
इसके तुरंत बाद, सत्ता पक्ष और विपक्षी दलों के बीच तीखी नोकझोंक होने लगी। सत्ता पक्ष ने राजस्थान में कानून-व्यवस्था की स्थिति का मुद्दा उठाया, जबकि विपक्ष ने मणिपुर हिंसा पर चर्चा पर जोर दिया। सभापति ने करीब 30 मिनट के लिए कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी, लेकिन जब सदन दोबारा शुरू हुआ तो ऐसे ही दृश्य देखने को मिले।