हर घर का मेहमान हो गया गजोधर भैया का किरदार
लोकप्रियता का सफर संघर्ष भरा था, लेकिन वे मंच पर हंसी को उस मोड़ तक ले जाने में सफल रहे, जहां दाग अच्छे लगते हैं, बीमार होने का मजा ही कुछ और है और जहां सब कुछ ठंडा-ठंडा कूल-कूल है। ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज की सफलता ने राजू श्रीवास्तव को बड़ी ताकत दी थी। प्रसिद्धि मिली तो पैसा भी आया। फिर कई फिल्मों भी आईं। उनके कई अवतार भी आए, जिसमें गजोधर भैया का किरदार तो हर घर का मेहमान हो गया।
उनके जाने के बाद...हम खाली हो गए
लोग हंसते रहे हैं, लोग हंसते रहेंगे। लेकिन क्या हम गजोधर भैया को भूल पाएंगे? शामें होती रहेंगी सुबहें और सुबहें धीरे-धीरे होती रहेंगी शाम, लेकिन क्या उनके जाने के बाद, जो हम हो गए हैं खाली, क्या और नहीं होते जाएंगे खाली?
अमिताभ के ड्राइवर से मिलकर खुश हो जाता था
शुरू-शुरू में अमिताभ बच्चन से मिलना तो मुश्किल था, लेकिन खुशी उनके ड्राइवर से मिलकर भी बहुत होती थी। मैं अपने दोस्तों को फोन करके बताता था कि आज अमिताभ के ड्राइवर से हाथ मिलाया, अमिताभ के बंगले की दीवार भी छुई। -राजू श्रीवास्तव
द्रौपदी मुर्मू ने जताया शोक
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राजू श्रीवास्तव के निधन पर शोक जताया। उन्होंने ट्वीट किया, प्रख्यात हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव के असामयिक निधन से बेहद दुखी हूं। अपनी हास्य प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने की उनमें विलक्षण प्रतिभा थी। उनके प्रभाव से भारत में हास्य के मंचन को नई पहचान मिली। उनके परिवार व प्रशंसकों को मेरी सांत्वना।
राजू का निधन कला जगत के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने अपनी खास अदा से वर्षों तक लोगों का मनोरंजन किया। -अमित शाह, गृह मंत्री
राजू श्रीवास्तव ने अपनी कड़ी मेहनत और हुनर से हास्य को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। मैं ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करने की प्रार्थना करता हूं। -योगी आदित्यनाथ, सीएम, यूपी
राजू श्रीवास्तव के निधन से स्तब्ध हूं। मंझे हुए कलाकार के साथ वह जिंदादिल इंसान भी थे। उनके परिवार के प्रति सांत्वना व्यक्त करता हूं। -राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री
मिमिक्री किंग और शानदार कलाकार राजू श्रीवास्तव के असामयिक निधन से दुखी हूं। उनके परिवार व प्रशंसकों को मेरी सांत्वना। -रामनाथ कोविंद, पूर्व राष्ट्रपति
टॉकीज, टीवी, सोशल मीडिया राजू ने हर जगह खूब हंसाया
राजू श्रीवास्तव ने अपने चाहने वालों की मुस्कान का भरपूर ख्याल रखा। टॉकीज के पर्दे पर फिल्में हों, टीवी पर कॉमेडी शो या सोशल मीडिया पर रील व वीडियो क्लिप का जमाना, उन्होंने अपने प्रशंसकों को खूब हंसाया। दूरदर्शन के लोकप्रिय धारावाहिक शक्तिमान में भी काम किया। इसमें रिपोर्टर धुरंधर सिंह के किरदार में उनकी डायलॉग डिलीवरी और अंदाज की खूब सराहना हुई थी।
कैसेट्स से कम हुई किल्लत
1986-87 में मेरी ‘हंसो-हंसाओ’, ‘हंसते रहो’ और ‘हंसना मना है’ जैसी ऑडियो कैसेट्स आईं। इन कैसेट्स की मांग खूब थी, लेकिन दायरा सीमित था। लोग आवाज सुनते थे, चेहरे से कोई नहीं पहचानता था। फायदा सिर्फ यह हुआ कि पहले एक कार्यक्रम के 500-1000 रुपये मिलते थे, कैसेट से अब 10 से 15 हजार रुपये तक मिलने लगे।
‘मैंने प्यार किया’ पहली फिल्म
पहली फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ थी, फिर ‘बाजीगर’, ‘मिस्टर आजाद’, ‘आमदनी अट्ठनी खर्चा रुपैया’ व ‘वाह तेरा क्या कहना’ जैसी फिल्में कीं। यह वो दौर था, जब स्टैंड-अप कॉमेडी में मजा आ रहा था। पैसा भी अच्छा-खासा मिल रहा था। शो देखने के लिए टिकट बिकने लगी थीं। इसका कुछ श्रेय महानायक अमिताभ बच्चन को भी जाता है।
मेरे लिए तो अमिताभ बच्चन भगवान सरीखे
मेरे लिए तो अमिताभ बच्चन भगवान हैं, उनके नाम से हमारा मजाक उड़ाया जाता था। 14-15 साल की उम्र से ही मैं अमिताभ का फैन बन गया था। ‘शोले’ देखने के बाद से ही अमिताभ का भक्त-सा हो गया। चलना, उठना-बैठना और हेयरस्टाइल सब अमिताभ जैसा। लोग मुझे जूनियर अमिताभ कहकर बुलाने लगे।