रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि नौसेना की तैयारी किसी को उकसाने के लिए नहीं बल्कि समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति की गारंटी है। रक्षामंत्री ने कलावरी श्रेणी की पनडुब्बी आईएनएस खंडेरी में करीब एक घंटा समुद्र में बिताया और नौसेना की जंगी तैयारियों का जायजा लिया।
राजनाथ ने कहा, आईएनएस खंडेरी पर वक्त बिताना बेहद सुखद और रोमांचकारी अनुभव था। वहां से लौटकर मैं भारत की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हूं। उन्होंने कहा, भारतीय नौसेना एक आधुनिक, शक्तिशाली और विश्वसनीय बल है जो हर स्थिति में सतर्क, बहादुर और विजयी बने रहने की क्षमता रखती है। रक्षामंत्री करवार नौसेना बेस के दो दिवसीय दौरे पर बृहस्पतिवार को पहुंचे थे। उन्होंने नौसैनिकों से बात की। राजनाथ ने कहा, आज भारतीय नौसेना दुनिया की अग्रणी नौसेनाओं में शुमार है और दुनियाभर के शीर्ष देश भारत के सहयोग के लिए अपने नौसैनिकों की मदद करने को तैयार हैं।
मेक इन इंडिया को सराहा
राजनाथ ने कहा, आईएनएस खंडेरी को देश में ही तैयार किया गया। यह मेक इन इंडिया की क्षमताओं का श्रेष्ठ उदाहरण है। भारतीय नौसेना के लिए 41 जहाजों या पनडुब्बियों की जो खरीद होनी है उनमें से 39 को देश में ही तैयार किया जा रहा है। दस दिन पहले राजनाथ सिंह ने खुद मुंबई में दो जहाजों को लॉन्च किया। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत मुहिम को बल मिला है। राजनाथ ने कहा, आज जब देश आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर अमृत महोत्सव मना रहा है आईएनएस विक्रांत कमीशन होने के लिए तैयार है। मुझे पूरा भरोसा है कि आईएनएस विक्रांत आईएनएस विक्रमादित्य के साथ देश की समुद्री सुरक्षा को मजबूती देंगे।
राजनाथ ने आईएनएस घड़ियाल के चालक दल से बात की
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना के पोत आईएनएस घड़ियाल के चालक दल के साथ बातचीत की। यह पोत राहत सामग्री पहुंचाने के लिए श्रीलंका में है। नौसेना के अधिकारियों ने कहा कि बातचीत के दौरान सिंह ने भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति के अनुरूप भारतीय नौसेना के प्रयासों की सराहना की। अधिकारियों ने कहा कि रक्षा मंत्री सिंह ने भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति और निकटतम समुद्री पड़ोसी श्रीलंका के साथ देश के सदियों पुराने प्रगाढ़ संबंधों पर बल दिया। एक अधिकारी के अनुसार राहत सामग्री के साथ आईएनएस घड़ियाल के श्रीलंका पहुंचने पर खुशी जाहिर करते हुए रक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि यह जरूरत के वक्त अपने मित्रों के साथ खड़े रहने की भारत की सदियों पुरानी परंपरा के अनुरूप है।