राजस्थान की जनता आज अपने राज्य के साथ-साथ स्वयं अपने भाग्य का फैसला कर रही है। राज्य की 199 सीटों पर मतदान जारी है। अशोक गहलोत सरकार ने जनता से अपने कामकाज, विकास और भविष्य के वादों पर वोट मांगा है, जबकि भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजस्थान के विकास की बात की है। उन्होंने अशोक गहलोत सरकार में हुए कथित लूट, भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता को मुद्दा बनाया है। पार्टी ने सत्ता मिलने पर राज्य के बड़े विकास का वादा किया है। जनता ने दोनों राजनीतिक दलों में से किसकी दावों और वादों पर भरोसा किया, इस पर आज वह अपनी मुहर लगा रही है जिसका फैसला 3 दिसंबर को आएगा जब राज्य के विधानसभा चुनाव का परिणाम घोषित किया जाएगा।
अशोक गहलोत को अपने कामकाज पर पूरा भरोसा है। उन्होंने एक चुनावी सभा में खुलकर यह कहा कि यदि उनकी सरकार ने विकास का काम किया है तो उन्हें वोट दें, अन्यथा ना दें। इस तरह का दावा करने की हिम्मत बहुत कम सरकारों में होती है अशोक गहलोत यह दम दिखा रहे हैं तो इसका एक ही कारण है कि उन्हें अपने कामों और अपनी योजनाओं पर पूरा भरोसा है।
वहीं, भाजपा के जयपुर स्थित मुख्य चुनावी कार्यालय में हनुमान जी की बड़ी मूर्ति स्थापित की गई है। यहां आने वाले हर भाजपा नेता हनुमान जी से आशीर्वाद लेकर ही चुनाव प्रचार के लिए निकलते रहे हैं। इस चुनाव में भाजपा को हनुमान जी का कितना आशीर्वाद मिलेगा, यह 3 दिसंबर को पता चल जाएगा। अशोक गहलोत सरकार ने सांप्रदायिकता के मुद्दे का सामना करने के लिए कोई बड़ा हिंदू कार्ड नहीं खेला है। जिस तरह मध्य प्रदेश में कमलनाथ और छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल ने बड़ा हिंदू कार्ड खेल कर भाजपा के मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोपों का जवाब देने की कोशिश की है, उस तरह की कोई कोशिश अशोक गहलोत ने अपने राज्य में नहीं किया है।
जबकि भाजपा ने मुस्लिम समुदाय के एक भी व्यक्ति को उम्मीदवार न बनाकर और बाबा बालकनाथ - प्रताप पुरी जी महाराज जैसे हिंदूवादी नेताओं को चुनाव में उतारकर अपनी रणनीति साफ कर दी थी। संभवतः इसी रणनीति पर चलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भाजपा के सभी शीर्ष नेताओं ने अपने चुनावी भाषणों में कन्हैयालाल हत्याकांड पर अशोक गहलोत सरकार पर हमला बोला। भाजपा के प्रत्याशी भी इन मुद्दों को जोरशोर से उठाते रहे। शायद भाजपा की इसी कोशिश का परिणाम है कि राजस्थान में यह एक मुद्दा बनता दिखाई पड़ रहा है। इसका भाजपा को कितना लाभ मिला यह भी जल्द ही सामने आ जाएगा।
युवा पीढ़ी का मुद्दा
वहीं राज्य के युवाओं के लिए आरपीएससी में पेपर लीक बड़ा चुनावी मुद्दा बन चुका है। मतदान करने के लिए आए अभिनव कुमार ने अमर उजाला से कहा कि राज्य के लाखों युवाओं की उम्मीद पेपर लीक के कारण टूट चुकी है। पिछले पांच साल के दौरान उनके जैसे हजारों युवाओं की उम्र सीमा निकल चुकी है। अब वे भविष्य में कभी भी राजस्थान पब्लिक सर्विस कमीशन की नौकरियों के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे। ऐसे में उनके जैसे युवा सरकार के खिलाफ मतदान करेंगे जिससे राज्य की दूसरी युवा पीढ़ी का भविष्य इस तरह बर्बाद ना हो।
महिला सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण
जयपुर की वोटर संगीता देवी का कहना है कि महिला सुरक्षा उनके लिए जब बड़ा मुद्दा है। सरकार ने विकास किया है, इससे कोई इनकार नहीं है, लेकिन पिछले पांच साल में महिलाओं से अपराध की 35 हजार घटनाएं घटी हैं। सरकार अपराधियों पर लगाम लगाने में बुरी तरह असफल रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए राशन और स्वास्थ्य से ज्यादा सुरक्षा ज्यादा अहम मुद्दा है। उन्हें उत्तर प्रदेश के बाबा योगी आदित्यनाथ जैसा मुख्यमंत्री चाहिए जो अपराधियों का खात्मा कर सके।