राजस्थान के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा ने टिकट देने में ब्राह्मण, राजपूत, एससी, एसटी व जाट समुदाय के लोगों को तव्वजो दी थी। अगर राजपूत समुदाय की बात करें, तो कांग्रेस पार्टी ने 17 उम्मीदवारों को टिकट दिया। भाजपा ने 25 प्रत्याशियों को मौका दिया था। कांग्रेस की तरफ से ब्राह्मण समाज के 16 उम्मीदवारों को टिकट दिया गया था। भाजपा ने ब्राह्मण समुदाय के 20 लोगों को विधानसभा चुनाव में उतारा था। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में यादव व आदिवासी समुदाय के व्यक्ति को सीएम बनाया गया है। बिहार में जब जातिगत गणना के नतीजे जारी किए गए, तो उसके बाद ब्राह्मण समुदाय पर कई तरह की टिप्पणियां हो रही थीं। दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी इस बार ओबीएस पर ज्यादा फोकस कर रही थी।
राहुल गांधी ने चुनाव प्रचार में जातिगत गणना का मुद्दा उठाया था। देश में पहले कांग्रेस पार्टी के साथ सवर्णों के जुड़े रहने की बात की जाती थी। बाद में भाजपा ने कांग्रेस के इस परंपरागत वोट बैंक में जबरदस्त सेंध लगाई। पिछले कुछ समय से भाजपा के लिए ब्राह्मणों को अपने साथ रखना एक चुनौती बनती जा रही थी। लोकसभा चुनाव में इस समुदाय को अपने साथ जोड़े रखने और भाजपा सवर्णों से दूर जा रही है, ऐसे कयासों पर विराम लगाने के लिए भाजपा ने राजस्थान में सीएम की कुर्सी पर भजनलाल शर्मा को बैठाया है।