नई पार्टी के गठन के बाद राजा भैया मोदी सरकार के एससी-एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के संशोधन के फैसले को संसद में अध्यादेश लाकर पलटने को सियासी मुद्दा बना सकते हैं। राजा भैया से जुड़े सूत्रों ने बताया कि गैर दलित लोगों को लामबंद किया जाएगा। पिछड़ों और सवर्णों की खेमेबंदी के बाद नई पार्टी की घोषणा की जा सकती है। राजा भैया एससीएसटी एक्ट में बदलाव को लेकर सवर्णों में उपजे गुस्से को पूरी तरह से भुनाने की जुगत में हैं।
30 नवंबर को लखनऊ में दिखाएंगे ताकत
नवरात्रि में नई पार्टी के गठन के बाद राजाभैया 30 नवंबर को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में अपनी ताकत दिखाएंगे, जिसके लिए जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं। दरअसल, इसी दिन राजा भैया के राजनीति में 25 साल पूरे हो रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक इसी बहाने राजा भैया अपना शक्ति प्रदर्शन करना चाहते हैं।
पूर्व मंत्री राजा भैया के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गृहमंत्री राजनाथ सिंह समेत कई बड़े नेताओं से करीबी रिश्ते हैं। योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद से वह लगातार उनके संपर्क में रहे। गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भी उनकी नजदीकियां जगजाहिर हैं। इसके बाद भी वह भाजपा में शामिल नहीं हुए।
जोड़तोड़ की राजनीति के माहिर खिलाड़ी
राजा भैया को जोड़तोड़ की सियासत का माहिर खिलाड़ी माना जाता है। 2003 में भाजपा-बसपा गठबंधन की सरकार के समय राजाभैया 37 विधायकों को लेकर अलग हो गए थे। उन्होंने मुलायम सिंह का समर्थन कर दिया था। माना जाता है कि सभी दलों के राजपूत विधायक राजा भैया को अपना नेता मानते हैं।
सोशल मीडिया पर समर्थकों ने दो महीने से छेड़ रखा था अभियान
सोशल मीडिया पर राजा भैया के समर्थकों ने दो महीने से उनके पार्टी बनाने को लेकर अभियान छेड़ रखा था। लोगों से पूछा जा रहा था कि आखिर राजा भैया को क्या करना चाहिए। भाजपा में शामिल होना चाहिए, सपा के साथ रहना चाहिए या फिर अपनी पार्टी बनानी चाहिए। आखिर में राजाभैया के नई पार्टी बनाने के फैसले पर मुहर लगी।