बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बेटियों मीसा भारती और हेमा यादव को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से फौरी राहत मिल गई है। कोर्ट ने रेलवे में नौकरी के बदले जमीन घोटाले के मामले में तीनों को 28 फरवरी तक अंतरिम जमानत दे दी है। विशेष न्यायमूर्ति विशाल गोगने ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के उस दावे के बाद तीनों आरोपियों को जमानत दे दी कि उसे उनकी नियमित जमानत याचिका पर दलीलें दाखिल करने के लिए समय चाहिए।
ईडी ने किया था बड़ा दावा
उधर, ईडी ने बिहार में जमीन के बदले नौकरी मामले में बड़ा दावा किया था। ईडी के अनुसार राजद प्रमुख लालू प्रसाद की पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्ययमंत्री राबड़ी देवी की गौशाला के एक पूर्व कर्मचारी ने रेलव में नौकरी पाने के इच्छुक व्यक्ति से संपत्ति हासिल की और बाद में उसे लालू-राबड़ी दंपती की पुत्री हेमा यादव को सौंप दी। केंद्रीय एजेंसी ने इस महीने की शुरुआत में दिल्ली की एक अदालत में आरोप-पत्र दायर किया था, जिसमें कुछ बाहरी लोगों के अलावा लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों राबड़ी देवी, मीसा भारती हेमा यादव को आरोप बनाया गया है।
क्या ये मामला 2017 के IRCTC घोटाले से अलग है?
IRCTC का मामला रेलवे भर्ती घोटाले से अलग है। IRCTC घोटाले का आरोप भी 2004 में लालू के रेल मंत्री रहते होने की बात है। दरअसल, रेलवे बोर्ड ने उस वक्त रेलवे की कैटरिंग और रेलवे होटलों की सेवा को पूरी तरह IRCTC को सौंप दिया था। इस दौरान रांची और पुरी के बीएनआर होटल के रखरखाव, संचालन और विकास को लेकर जारी टेंडर में अनियमिताएं किए जाने की बातें आई थीं।
ये टेंडर 2006 में एक प्राइवेट होटल सुजाता होटल को मिला था। आरोप है कि सुजाता होटल्स के मालिकों इसके बदले लालू यादव परिवार को पटना में तीन एकड़ जमीन दी, जो बेनामी संपत्ति थी। इस मामले में भी लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत कई लोग आरोपी हैं।