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कोरोना की तीसरी लहर से पहले प्रवासियों में सफर की बेकरारी, फिर बढ़ने लगी है ट्रेनों की मांग

Wed, 12 May 2021 06:42 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अधिकारियों ने बताया कि कोविड संक्रमण को देखते हुए कई बड़े शहरों से ट्रेनों की डिमांड आ रही है। सबसे ज्यादा डिमांड महाराष्ट्र से ही रही है। महाराष्ट्र से चलने वाली ट्रेनें अपनी पूरी क्षमता के साथ चल रही हैं...
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रेलवे स्टेशन पर भीड़ - फोटो : अमर उजाला (फाइल)
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विस्तार
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देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने हालात खराब कर दिए हैं। इस महामारी के कारण दवाइयों से लेकर अस्पतालों में बेड की किल्लत बनी हुई है। आलम यह है कि हर दिन तीन लाख से ज्यादा नए केस सामने आ रहे हैं। बढ़ते संक्रमण को देखते हुए राज्य सरकारों ने एहतियातन लॉकडाउन भी लगाया। इससे बड़े शहरों से मजदूरों का पलायन भी बहुत तेजी से हुआ है। अप्रैल महीने में दूसरी लहर के दौरान मुंबई, दिल्ली सहित अन्य बड़े शहरों से 600 अधिक 'ग्रीष्मकालीन विशेष' ट्रेनें 100 फीसदी क्षमता के साथ प्रवासियों को लेकर चलीं। अब कोरोना की तीसरी लहर के डर फिर से लोगों को अपने खाने-कमाने की चिंता हो रही है। यही वजह है कि मजदूर अपने गांव या शहरों के लिए फिर से निकल कर रहे हैं। बड़े शहरों से ट्रेनों की मांग फिर बढ़ती हुई दिखाई दे रही है।

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नाम न छापने के अनुरोध पर रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि कोविड संक्रमण को देखते हुए कई बड़े शहरों से ट्रेनों की डिमांड आ रही है। सबसे ज्यादा डिमांड महाराष्ट्र से ही रही है। महाराष्ट्र से चलने वाली ट्रेनें अपनी पूरी क्षमता के साथ चल रही हैं। इन दिनों जो 677 स्पेशल ट्रेनें चल रही हैं, वे भी अपनी पूरी क्षमता के साथ चल रही हैं। मुंबई, पुणे, सुरत और दिल्ली से उत्तर और पूर्व भारत की तरफ चलने वाली ट्रेनों में इन दिनों ज्यादा भीड़ नजर आ रही है।

उन्होंने आगे कहा, शहरों में लगते लॉकडाउन और कोरोना से होती मौतों के डर से लोग अपने घरों की तरफ जा रहे हैं। इसलिए ट्रेनों में भीड़ नजर आ रही है। जिन शहरों में ज्यादा ट्रेनों की आवश्यकता होगी वहां हम नई ट्रेनें शुरू करेंगे, ताकि लोगों को परेशानी नहीं हो। मुंबई और सूरत से समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, मऊ की ओर जाने वाली ट्रेनों में स्लीपर क्लास और सेकंड क्लास में भी पिछले कई दिनों से वेटिंग देखने को मिल रही है। महाराष्ट्र से गाजीपुर, कानपुर, छपरा, वाराणासी तक चलने वाली ट्रेनों में भी वेटिंग लिस्ट देखने को मिल रही है। ये सभी ट्रेनें पूरी क्षमता के साथ चल रही हैं।

अधिकारी ने आगे बताया, पिछले वर्ष मार्च में लगे लॉकडाउन के बाद मजदूर बड़ी संख्या में पैदल ही अपने घरों की तरफ जाने लगे थे। लेकिन इस बार किसी को कोई परेशानी नहीं हो इसलिए सरकार ट्रेनों को चला रही है। सभी रेलवे डिवीजनों को यात्रियों की मांग पर नजर रखने के लिए कहा गया है ताकि लोगों के लिए स्पेशल ट्रेनें शुरू कर सकें। वेटिंग लिस्ट को क्लीयर करने के लिए स्पेशल ट्रेनें भी चलाई जा रही हैं। इन दिनों कुछ मेल एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द भी किया है, क्योंकि इनमें कम यात्री सफर कर रहे थे।

1952 रेलवे कर्मचारी की हुई मौत, रोज एक हजार होते हैं संक्रमित

रेलवे के अनुसार, हम भी कोविड के मामले झेल रहे हैं। हम परिवहन का काम करते हैं और सामान व लोगों को लाते और ले जाते हैं। रेलवे में 13 लाख कर्मचारी काम करते हैं। इस समय हम लोगों की मदद कर रहे हैं लेकिन हमारी हालात भी अच्छी नहीं है। मार्च 2020 से अब तक वायरस संक्रमण की वजह से भारतीय रेलवे के 1952 कर्मचारी जान गंवा चुके हैं। वहीं रोज करीब 1000 कर्मचारी संक्रमित होते रहे हैं।

रेलवे के अपने अस्पताल हैं। इसमें बेड की संख्या भी बढ़ाई है। इसके साथ ही रेल अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट बनाए हैं। हम अपने कर्मियों का ध्यान रख रहे हैं। फिलहाल 4000 रेलवे कर्मी या उनके परिवार के सदस्य इन अस्पतालों में भर्ती हैं। हमारा प्रयास यह है के जल्दी ठीक हों।

कुछ दिनों पहले ऑल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन ने रेल मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर मांग की थी कि कोरोना वायरस संकट के दौरान काम करते हुए जान गंवाने वाले रेलकर्मियों के परिजनों को फ्रंट लाइन वर्कर के कर्मियों की तरह ही मुआवजा दिया जाए। उन्होंने पत्र में कहा कि जैसा कि फ्रंट लाइन वर्कर के कर्मियों के लिए घोषणा की गई है, ये वर्कर भी 50 लाख रुपये के मुआवजे के हकदार हैं, न कि 25 लाख रुपये के, जो उन्हें अभी दिया जा रहा है।

अखिल भारतीय रेलवे महासंघ का कहना है, कोरोना वायरस से एक लाख से अधिक रेलवे कर्मी संक्रमित हुए हैं, इनमें से करीब 65 हजार कर्मी ठीक हो चुके हैं और ड्यूटी ज्वाइन कर ली है। रेलवे सभी कर्मियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है और जोखिम को कम करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए हैं।
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रेलवे ने देश में अब तक 5,735 टन ऑक्सीजन पहुंचाई

भारतीय रेलवे ने बीते 19 अप्रैल से जारी अपने विशेष अभियान के तहत विभिन्न राज्यों को 5,735 टन ऑक्सीजन पहुंचा चुकी है। मंगलवार तक की जानकारी के अनुसार रेलवे ने अब तक 90 से अधिक ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेनों ने देश में ऑक्सीजन पहुंचाई है। सोमवार को ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेनों के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों में 755 टन ऑक्सीजन पहुंचाई गई। अब तक 90 से अधिक ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेनें अपनी यात्रा पूरी कर चुकी हैं। इसमें महाराष्ट्र को 293 टन, उत्तर प्रदेश को 1,630 टन, मध्यप्रदेश को 340 टन, हरियाणा को 812 टन, तेलंगाना को 123 टन, राजस्थान को 40 टन, कर्नाटक को 120 टन और दिल्ली को 2,383 टन से अधिक ऑक्सीजन पहुंचाई गई है। वहीं, देहरादून (उत्तराखंड) और पुणे (महाराष्ट्र) के निकट स्टेशनों पर भी पहली ऑक्सीजन एक्सप्रेस पहुंचने वाली हैं। रेलवे ने कहा कि ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेनों के तेजी से आवागमन के लिए एक ग्रीन कॉरिडोर भी बनाया गया है।
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