ट्रेनों की लेटलतीफी थमने का नाम नहीं ले रही है। राजधानी, शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनों का किराया तो फ्लैक्सी फेयर में हर मिनट बढ़ जाता है लेकिन समयबद्धता घटती जा रही है।
रेलवे के कई जोन में अप्रैल से जून के बीच 35 प्रतिशत ट्रेन समयबद्धता का पालन नहीं कर पाईं। सुपर फास्ट ट्रेनों की स्थिति तो और खराब है। उत्तर रेलवे की 60 प्रतिशत ट्रेनें समय पर नहीं चल रही है। पूर्वोत्तर की बात करें तो यहां महज 13.74 प्रतिशत ट्रेन समय पर चल रही हैं।
राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में रेल मंत्रालय ने बताया कि निर्माण कार्य के कारण गति प्रतिबंध लगाया गया है। इस कारण पूरे भारतीय रेलवे के समय पालन में गिरावट आई है।
फ्लैक्सी फेयर वाली शताब्दी और राजधानी ट्रेन भी सुस्त रफ्तार से चल रही हैं। अप्रैल से जून 2018 के दौरान रेल मार्ग के रखरखाव का काम 46056 घंटे तक चला। यह पिछले साल की तुलना में 11.89 प्रतिशत अधिक है।
आंकड़ों के अनुसार, उत्तर रेलवे में 20 प्रतिशत राजधानी ट्रेन समय पर नहीं चल रही है। दक्षिण पूर्व मध्य क्षेत्र की 70 प्रतिशत राजधानी ट्रेनें देरी से चल रही है तो पूर्वी क्षेत्र की 64 प्रतिशत राजधानी ही अपने समय पर चल रही है। इसी तरह अगर शताब्दी एक्सप्रेस की बात करें तो पूर्वी जोन की 55 प्रतिशत ही ट्रेनें समयबद्घता का पालन कर पा रही है।
दक्षिण पूर्व क्षेत्र में सर्वाधिक 92 प्रतिशत शताब्दी एक्सप्रेस रेलगाड़ियां समय से चल रही है। यहीं हाल सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन का है। उत्तर रेलवे जोन में चलने वाली 41.16 प्रतिशत ट्रेन ही समय पर चल रही है।
पूर्वोत्तर रेलवे की बात करें तो इस जोन की महज 14 प्रतिशत ट्रेन समय पर चल रही है। पूर्व मध्य रेलवे जोन में चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेन 24 प्रतिशत ही समय का पालन कर रही है।