राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जिस तरीके से वरुण गांधी भाजपा और उनकी नीतियों को लगातार निशाने पर लेते आ रहे हैं उससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि आने वाले लोकसभा के चुनाव में उनका सियासी ठिकाना बदल सकता है। राहुल की मुलाकात के बाद इस तरीके के कयास और पुख्ता होते जा रहे हैं। राजनीतिक जानकार मुकेश सिंह कहते हैं कि पहले भी ऐसे कई मौके आए हैं, जिससे स्पष्ट हुआ है कि अगले चुनाव में वरुण गांधी भाजपा से अलग होकर चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। हालांकि स्पष्ट रूप से अभी किसी भी सियासी दल ने और वरुण गांधी ने इस तरीके का कोई साफ-साफ संदेश तो नहीं दिया है। लेकिन कभी समाजवादी पार्टी तो कभी कांग्रेस में उनके आने की अटकलें लगती रही हैं।
मुकेश सिंह कहते हैं कि जब मुंशीगंज के संजय गांधी अस्पताल के लाइसेंस रद्द होने पर वरुण गांधी ने भाजपा सरकार को घेरकर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखी थी, तो उसका बड़ा सियासी संदेश रायबरेली अमेठी की जनता में गया था। क्योंकि अपनी चिट्ठी में वरुण गांधी ने न सिर्फ अपनी दादी इंदिरा गांधी का जिक्र किया था, बल्कि स्थानीय लोगों को होने वाली परेशानी का भी जिक्र इस चिट्ठी के माध्यम से किया था। यही वजह है कि वरुण गांधी के अब रायबरेली या अमेठी से कांग्रेस से चुनाव लड़ने की चर्चाएं भी इलाके में होने लगी थीं। अब केदारनाथ में वरुण गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात की चर्चा भी सियासी गलियारों में कई तरह के कयासों को आगे बढ़ा रही है।