कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने भाजपा-आरएसएस को जोकरों का समूह बताते हुए कहा कि उन्हें भारत की कोई समझ नहीं है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर भी तंज कसा और दावा किया कि उनके लिए विदेश नीति का मतलब नेताओं को गले लगाना रह गया है। इस दौरान राहुल गांधी ने आरएसएस को लेकर एक और बड़ी बात कही, कांग्रेस सांसद ने कहा कि जिस दिन आरएसएस की अभिव्यक्ति को देश से बाहर करने की कोशिश शुरू हुई तो मैं उस दिन मैं खुद उनकी रक्षा करूंगा, क्योंकि उनकी भी अभिव्यक्ति की आजादी है।
रचनात्मक कांग्रेस के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा, हमें अपने अभिव्यक्ति को दबाना नहीं है। जिस दिन आरएसएस की अभिव्यक्ति को देश से खत्म करने की बात होगी, उस दिन मैं उनकी रक्षा करूंगा, क्योंकि अभिव्यक्ति उनकी भी है। हमारा कहना है कि जिसके मन में जो हो, वो खुलकर बोले, लेकिन कोई किसी को दबा नहीं सकता। हिंदू, मुस्लिम, सिख, जैन कोई भी व्यक्ति अपनी बात खुलकर कह सकता है। जब देश का अभिव्यक्ति बाहर आएगा, तभी देश की ताकत पूरी दुनिया को दिखाई देगी। मगर ये लोग देश केअभिव्यक्ति को ही मारने पर तुले हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि यह समझना जरूरी है कि लड़ाई उन लोगों के बीच है, जो दूसरों पर अपना आदेश थोपना चाहते हैं और उन लोगों के बीच है, जो खुद को अभिव्यक्त करना चाहते हैं। उन्होंने जंतर-मंतर का उदाहरण देते हुए कहा कि छात्र अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन सरकार ने कहा कि उसे व्यवस्था चाहिए और छात्र अपनी बात नहीं रख सकते। राहुल गांधी ने कहा, "उनका (भाजपा-आरएसएस का) राजनीतिक दर्शन भारत पर ऐसी व्यवस्था थोपना है, जिससे उन्हें और कुछ अन्य लोगों को फायदा हो। हमारा काम भारत को खुद को अभिव्यक्त करने देना और उस व्यवस्था को तोड़ना है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस उन्हें पागल कर देगी।
'आरएसएस बड़े पूंजीपतियों का साधन बन गया'
राहुल गांधी ने दावा किया कि आरएसएस को बड़े पूंजीपतियों- अडानी और अंबानी ने अपने कब्जे में लेकर इस्तेमाल किया है।" उन्होंने कहा कि आरएसएस ने बहुत पहले अपनी अभिव्यक्ति खो दी थी। उन्होंने कहा कि शुरुआत में आरएसएस छोटे भारतीय कारोबारियों- सुनारों और बनियों की अभिव्यक्ति था, लेकिन वह खत्म हो गया। राहुल गांधी ने दावा किया कि नोटबंदी के जरिए आरएसएस ने अपने ही लोगों को खत्म कर दिया। उन्होंने कहा कि आरएसएस का कॉरपोरेटीकरण नरेंद्र मोदी के दौर में हुआ। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि अब आरएसएस बड़े पूंजी का साधन है और वह अदाणी का सेवक है, जैसे मोदी अडानी के सेवक हैं।
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'सभी को अभिव्यक्ति की अनुमति होनी चाहिए'
राहुल गांधी ने कहा कि जिस दिन आरएसएस की अभिव्यक्ति खत्म करने की बात होगी, वह उसकी रक्षा करेंगे। उन्होंने कहा, "हम कहते हैं कि सभी को अभिव्यक्ति की अनुमति होनी चाहिए।"
राहुल गांधी ने यह भी सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री मोदी कभी प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं करते। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले लगा था कि यह कोई रणनीति है, लेकिन मोदी के साथ पांच मिनट कमरे में बैठने के बाद उन्हें लगा कि वह मीडिया के सामने नहीं जा सकते।
'विदेश नीति का मतलब नेताओं को गले लगाना समझ लिया'
मोदी सरकार को विदेश नीति पर घेरते हुए राहुल गांधी ने कहा कि अमेरिका-ईरान युद्ध हुआ। ऐसे में अगर इंदिरा गांधी जी जैसा नेतृत्व होता, तो हमारे पास सबसे बड़ी अवसर होता। क्योंकि ईरान हमारा पुराना दोस्त है, अमेरिका और रूस भी हमारा दोस्त है तो हम इनकी आपस में दोस्ती करा सकते थे। लेकिन पाकिस्तान हमारी जगह उठाकर ले गया और नरेंद्र मोदी देखते रह गए।
राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दिमाग में किसी तरह यह बात बैठ गई है कि विदेश नीति नेताओं को गले लगाने के बारे में है। इसके बाद उन्होंने रचनात्मक कांग्रेस के प्रमुख संदीप दीक्षित को गले लगाकर मौजूदा सरकार की विदेश नीति का उदाहरण पेश किया।उन्होंने कहा, "कल्पना कीजिए, कितनी अज्ञानता है... उन्हें यह विचार कहां से मिला कि विदेश नीति नेताओं को गले लगाने के बारे में है।