सूरत कोर्ट से राहत मिलने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्विटर के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, 'ये मित्रकाल के विरुद्ध लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है। इस संघर्ष में सत्य मेरा अस्त्र है और सत्य ही मेरा आसरा! इससे पहले मानहानि के मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की सजा को चुनौती देने वाले मामले की अगली सुनवाई 3 मई को सूरत की अदालत में होगी। कोर्ट ने संबंधित पक्ष से 10 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने को कहा है। सूरत सत्र न्यायालय ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख 13 अप्रैल तय की है। इसी दिन तक के लिए राहुल गांधी को जमानत भी दे दी गई है।
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इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अवमानना मामले में सुनाई गई सजा के खिलाफ अपील में कहा कि निचली अदालत ने उनके साथ बहुत ही कठोरता दिखाई। मजिस्ट्रेट की अदालत के फैसले को त्रुटिपूर्ण और विकृत करार देते हुए राहुल ने कहा कि उन्हें इस तरह से सजा सुनाई गई जिससे कि वे संसद की सदस्यता से अयोग्य हो जाएं।
कांग्रेस नेता ने कहा है कि निचली अदालत ने उनके साथ बहुत कठोर व्यवहार किया जो एक सांसद के रूप में उनकी स्थिति से बहुत दबाव में थी। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड में निश्चित मोदी समाज या समुदाय जैसी कोई चीज नहीं है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की ओर से पारित आदेश आपराधिक मामले में साक्ष्य पर आधारित सिद्धांतों का घोर उल्लंघन है। उन्हें बिना किसी सबूत के ही दोषी ठहराया गया और सजा सुनाई गई।
राहुल ने अपनी अपील में आगे कहा है कि मजिस्ट्रेट की अदालत का फैसला मान्यताओं, अनुमानों, संभावनाओं, अटकलों, शंकाओं और अप्रमाणित विचारों पर आधारित है जो आपराधिक कानून में बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं हैं। फैसला कानून की नजर में भी खराब है। ऐसे मामले में उन्होंने (ट्रायल जज) निश्चित रूप से माना होगा कि दो साल की अधिकतम सजा संसद सदस्य के रूप में उन्हें अयोग्य ठहराएगी।
राहुल गांधी के लिए किसी के पास समय नहीं
राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि हर कोई अपना काम करने में व्यस्त है, किसी के पास राहुल गांधी के लिए समय नहीं है। साथ ही कहा कि अगर उन्होंने (राहुल गांधी) माफी मांग ली होती तो उन्हें कोई सजा नहीं मिलती, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। यह उनके अहंकार के कारण हो रहा है।
दरअसल, 2019 में मोदी उपनाम को लेकर की गई टिप्पणी के मामले में 23 मार्च को सूरत की सीजेएम कोर्ट ने धारा 504 के तहत राहुल को दो साल की सजा सुनाई थी। हालांकि, कोर्ट ने फैसले पर अमल के लिए 30 दिन की मोहलत भी दी थी। 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान कर्नाटक के कोलार की एक रैली में राहुल गांधी ने कहा था, 'कैसे सभी चोरों का उपनाम मोदी है?' इसी को लेकर भाजपा विधायक और गुजरात के पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था।
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इसके बाद 24 मार्च को लोकसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता जाने का आदेश जारी कर दिया। साज सुनाए जाने के 11 दिन बाद राहुल ने सूरत कोर्ट में जमानत और सजा माफी के लिए याचिका लगाई। जिस पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राहुल को 13 अप्रैल तक जमानत दे दी।