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कांग्रेस को राहुल ही पसंद है: दोबारा ताजपोशी के लिए किन शर्तों पर होंगे तैयार, चुनावों तक रुकने का क्या होगा फायदा

प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Sat, 16 Oct 2021 06:34 PM IST

सार

कांग्रेस एक बार फिर नेहरु-गांधी परिवार के शरण में है। राहुल गांधी दोबारा कांग्रेस की ड्राइविंग सीट पर बैठ सकते हैं। लेकिन इस  बार अपनी शर्तों पर.......क्या होंगी उनकी शर्तें, कैसे बदलेगी पार्टी 
 
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ट्रैक्टर चलाते राहुल गांधी (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter : @RahulGandhi
क्या राहुल गांधी वास्तव में दोबारा कांग्रेस के अध्यक्ष बनने के लिए राजी हो गए हैं? पार्टी नेताओं की मानें तो आज हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में एकमत से राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की बात हुई। इस पर राहुल गांधी ने अध्यक्ष बनने की बात पर विचार करने की बात कही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के मुताबिक सभी नेता चाहते हैं कि राहुल गांधी अध्यक्ष बने।

वहीं पार्टी की दूसरी वरिष्ठ नेता अंबिका सोनी ने इस बैठक के बाद कहा है कि सभी नेताओं की सर्वसम्मति से राय थी कि राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनना चाहिए। वे बनते हैं या नहीं, यह उन पर निर्भर करता है।  पार्टी के मीडिया विभाग के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने बताया कि कार्यसमिति के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से राहुल गांधी को पार्टी का नेतृत्व करने के लिए कहा, जिस पर उन्होंने कहा है कि वह इस बारे में सोचेंगे।


तो क्या राहुल गांधी दोबारा अध्यक्ष बनने के लिए तैयार हो गए हैं? वे दिसबंर 2017 में पार्टी अध्यक्ष बने थे और 2019 में लोकसभा चुनाव में पार्टी को मिली हार के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। तब से सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर पार्टी का नेतृत्व कर रही हैं।

नेतृत्व करने के प्रस्ताव लगातार मिले
दरअसल राहुल के पास पार्टी नेतृत्व दोबारा हासिल करने का विकल्प लगातार खुला था और उन्हें इसके कई प्रस्ताव मिले लेकिन वे इस पद को हासिल करने के लिए तैयार नहीं थे। लेकिन 2020 आते-आते तक वे खुद को इसके लिए राजी करने लगे थे।

 
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ट्रैक्टर चलाते राहुल गांधी (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter : @RahulGandhi
क्या राहुल गांधी वास्तव में दोबारा कांग्रेस के अध्यक्ष बनने के लिए राजी हो गए हैं? पार्टी नेताओं की मानें तो आज हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में एकमत से राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की बात हुई। इस पर राहुल गांधी ने अध्यक्ष बनने की बात पर विचार करने की बात कही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के मुताबिक सभी नेता चाहते हैं कि राहुल गांधी अध्यक्ष बने।

वहीं पार्टी की दूसरी वरिष्ठ नेता अंबिका सोनी ने इस बैठक के बाद कहा है कि सभी नेताओं की सर्वसम्मति से राय थी कि राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनना चाहिए। वे बनते हैं या नहीं, यह उन पर निर्भर करता है।  पार्टी के मीडिया विभाग के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने बताया कि कार्यसमिति के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से राहुल गांधी को पार्टी का नेतृत्व करने के लिए कहा, जिस पर उन्होंने कहा है कि वह इस बारे में सोचेंगे।

तो क्या राहुल गांधी दोबारा अध्यक्ष बनने के लिए तैयार हो गए हैं? वे दिसबंर 2017 में पार्टी अध्यक्ष बने थे और 2019 में लोकसभा चुनाव में पार्टी को मिली हार के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। तब से सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर पार्टी का नेतृत्व कर रही हैं।

नेतृत्व करने के प्रस्ताव लगातार मिले
दरअसल राहुल के पास पार्टी नेतृत्व दोबारा हासिल करने का विकल्प लगातार खुला था और उन्हें इसके कई प्रस्ताव मिले लेकिन वे इस पद को हासिल करने के लिए तैयार नहीं थे। लेकिन 2020 आते-आते तक वे खुद को इसके लिए राजी करने लगे थे।

 

लखनऊ एयरपोर्ट पर राहुल गांधी (फाइल फोटो) - फोटो : Agency
2020 में भी हो गई थी अध्यक्ष बनने की भूमिका तैयार
सूत्रों का कहना है कि फरवरी 2020 में में केरल से लेकर राजस्थान तक में जन आक्रोश रैली का आयोजन किया गया, वो भी राहुल की ताजपोशी की एक भूमिका थी लेकिन मार्च में कोरोना महामारी फैल गई और पार्टी की रणनीति पर पानी फिर गया। जैसे ही दोबारा इस बात की सुगबुगाहट शुरु हुई जी-23 (असंतुष्ट) नेताओं के समूह की चिट्ठी बम के कारण एक बार फिर इस कोशिश पर विराम लग गया। 

अध्यक्ष बनेंगे तो हैरानी की बात क्या
राजनीति के जानकारों का कहना है कि वैसे भी पार्टी में सभी फैसले एक तरह से राहुल गांधी ही कर रहे हैं। पार्टी के आधिकारिक अध्यक्ष न होते हुए भी सार्वजनिक मंचों पर अध्यक्ष पद की अधिकांश जिम्मेदारियां निभाते नजर आते हैं। चाहे हाथरस का मामला हो या लखीमपुर खीरी का या मोदी सरकार की आलोचना करने का। राहुल गांधी हर मुद्दे पर पार्टी में सबसे आगे रहते हैं। वे अपनी पार्टी का चेहरा हैं। इसलिए यदि वे दोबारा अध्यक्ष बनते हैं तो इसमें हैरानी की कोई बात नहीं होनी चाहिए। वहीं पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि सोनिया गांधी स्वास्थ्य कारणों से लंबे समय तक यह जिम्मेदारी नहीं उठा सकती हैं इसलिए राहुल गांधी को आगे आना ही होगा।

कांग्रेस के पास गांधी परिवार के अलावा विकल्प नहीं
कांग्रेस को लंबे समय तक कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार जयशंकर गुप्त कहते हैं कि कांग्रेस की परेशनी यही है कि उसके पास नेहरु-गांधी परिवार के अलावा किसी और को अध्यक्ष बनाने का विकल्प ही नहीं है। पार्टी ने इस परिवार से बाहर सीताराम केसरी और नरसिम्हा राव को पार्टी अध्यक्ष बनाने का प्रयोग किया तो उसका अनुभव अच्छा नहीं रहा। फिर गांधी परिवार का कांग्रेस पर दबदबा रहा है इसलिए नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगता है कि नेहरू-गांधी परिवार से ही कोई अध्यक्ष बने, इसलिए राहुल गांधी ही इस पद के बड़े दावेदार माने जाते हैं।
 

वैष्णो देवी के दर्शन के लिए पैदल चलते राहुल गांधी - फोटो : Social Media
अगले साल सितंबर तक होगा अध्यक्ष का चुनाव
कांग्रेस के अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए पार्टी ने संगठनात्मक चुनाव की घोषणा कर दी है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने बताया कि बैठक में यह फैसला लिया गया है कि एक नवंबर से कांग्रेस का सदस्यता अभियान शुरु होगा। जो 31 मार्च 2022 तक चलेगा। पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव अगले साल 21 अगस्त से 20 सितंबर के बीच में होगा। यानी राहुल गांधी अगले साल सितंबर तक पार्टी अध्यक्ष बन सकते हैं। 

सूत्रों का कहना है कि पार्टी में मचे उठा-पटक के कारण राहुल गांधी के सलाहकारों ने उन्हें यह सुझाव दिया कि अभी पार्टी अध्यक्ष बनने का सही समय नहीं है। इसलिए बहुत सोच-समझकर अभी चुनावों की घोषणा की है ताकि पांच राज्यों में होने वाले चुनाव तक संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया जारी रहे।

समीकरण यह है कि यदि यह प्रक्रिया पहले शुरु कर दी जाती और राहुल गांधी अभी अध्यक्ष बन जाते तो अगले साल होने वाले पांच राज्यों के चुनाव की हार-जीत का सारा दारोमदार उन पर आ जाता। यदि पार्टी चुनाव में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाती है अध्यक्ष के तौर पर राहुल गांधी की दूसरी पारी भी तुरंत सवालों के घेरे में आ जाती। सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी इस बार बहुत ठोक-बजाकर पार्टी अध्यक्ष बनने का फैसला कर रहे हैं। यही वजह है कि 2019 में इस्तीफा देने के बाद से वे अब तक इस पर ना-नुकर करते रहे। 





 

पलक्कड़ में रोड शो के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
पार्टी हारी तो राहुल पर नहीं फूटेगा ठीकरा
एक राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि यह तय हो गया कि राहुल गांधी जब दोबारा पार्टी अध्यक्ष बनेंगे तब तक पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके होंगे। यदि इन चुनावों में पार्टी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाती है तो इसका ठीकरा सीधे तौर पर राहुल गांधी के सिर पर नहीं फोड़ा जाएगा क्योंकि चुनाव के समय वे पार्टी अध्यक्ष नहीं रहेंगे। यह ठीक वैसा ही होगा जैसे दिसंबर 2017 में उन्हें कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था और अगले साल मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की जीत का श्रेय राहुल गांधी को मिला था। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद उन्होंने पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।  

कैसी होगी राहुल 2.0 की कांग्रेस
पार्टी के वरिष्ठ नेता पीएल पुनिया बताते हैं कांग्रेस वहीं रहेगी, लेकिन उसमें अनुभव और युवा चेहरों का समन्वय होगा। पूरी पार्टी की शक्ल और सूरत तो नहीं बदली जा सकती क्योंकि पार्टी सिर्फ अध्यक्ष नहीं चलाते हैं। हां लेकिन कुछ महत्वपूर्ण बदलाव तो होंगे, क्योंकि हर नेतृत्व में कुछ जरूरी तब्दीलियां तो होती है।   

कई राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टी नेताओं से हुई बातचीत के आधार पर हम आपको बता रहे हैं कि राहुल गांधी यदि दोबारा अध्यक्ष बनते हैं तो कांग्रेस में क्या बदलाव हो सकते हैं। 

ऊर्जा से भरी नई कांग्रेस
वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी के मुताबिक यदि राहुल गांधी दोबारा अध्यक्ष बनें तो ऊर्जा से भरी हुई नई कांग्रेस होगी, जिस पर राहुल गांधी का पूरा नियंत्रण होगा। क्योंकि राहुल गांधी ने इस दौरान कई विधानसभाओं और लोकसभा चुनाव में मिली हार से कई सबक सिखे हैं। जब इंसान या कोई नेतृत्व असफल होता है तो असफलता बहुत कुछ सिखा जाती है।  


 

CPI leader Kanhaiya Kumar and Jignesh Mewani meet Rahul Gandhi - फोटो : pti
नई और युवा कांग्रेस
पार्टी में युवा और आंदोलन से निकले नेताओं को तरजीह मिलेगी। हाल ही में कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी को पार्टी में लाकर राहुल ने अपना संदेश पहले ही दे दिया है। यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास अगले साल पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव तक युवा नेतृत्व की एक फौज खड़ी करने की कवायद में लगे हुए हैं। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी शुरु से अपनी नई टीम के साथ वो अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठना चाहते थे जिसके लिए सोनिया गांधी तैयार नहीं हो रही थीं, लेकिन शायद अब इस बात की संभावना बेहद कम नजर आती है।

सूत्रों ने यह भी जानकारी दी कि पार्टी की युवा बिग्रेड जैसे सुष्मिता देव, जतिन प्रसाद, ज्योतिरादित्य सिंधिया जो राहुल गांधी के साथ हमेशा खड़े नजर आते थे वे पार्टी में राहुल गांधी की टीम में शामिल नहीं हो पाने और राहुल गांधी को फ्री हैंड नहीं मिलने के कारण ही पार्टी छोड़ कर चले गए। 

जिम्मेदारियों का बंटवारा
युवक कांग्रेस के एक पदाधिकारी का कहना है जब राहुल गांधी ने 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ा था तो उन्होंने हार की जिम्मेदारी खुद लेते हुए चिट्ठी लिखी थी। आपने गौर किया कि इस चिट्ठी में राहुल गांधी का यह दर्द झलका था कि किसी और ने हार की कोई जिम्मेदारी नहीं ली। इसका मतलब है कि राहुल गांधी अध्यक्ष बनने के बाद नेताओं की जिम्मेदारियां तय कर सकते हैं और नेता जिस तरह चुनाव जिताने का श्रेय लेते हैं उन्हें हार की भी जिम्मेदारी लेनी होगी। चुनाव जीताने का जिम्मेदारी केवल पार्टी अध्यक्ष की नहीं होती है।  
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