एसपीजी प्राप्त व्यक्ति की पार्टी कार्यकर्ता, मीडिया और स्थानीय पुलिस से दूरी
एसपीजी के पूर्व अधिकारी बताते हैं, स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप की सुरक्षा हटने के बाद बहुत कुछ बदल जाता है। खासतौर पर, रूट प्लान और वाहनों में भी कई बदलाव देखने को मिलते हैं। यह बात सही है कि एसपीजी प्राप्त व्यक्ति की पार्टी कार्यकर्ता, मीडिया और स्थानीय पुलिस से दूरी बनी रहती है। भले ही एसपीजी सुरक्षा वाला व्यक्ति किसी भी राज्य में जाए, वहां स्थानीय पुलिस तीसरे नंबर पर रहती है। अब राहुल और प्रियंका गांधी के चारों तरफ कार्यकर्ताओं, मीडिया कर्मियों और स्थानीय पुलिस की धक्कामुक्की देखी जा सकती है। यह सुरक्षा के लिहाज से ठीक संकेत नहीं है। लखनऊ एयरपोर्ट के बाहर राहुल गांधी जब अपनी गाड़ी में सवार हुए तो स्थानीय पुलिस, पार्टी कार्यकर्ता और मीडिया कर्मी उनके चारों तरफ उमड़ आए थे। सीआरपीएफ कमांडो ने मुश्किल से राहुल की गाड़ी को आगे निकाला।
पिछले साल राहुल गांधी जब हाथरस कांड के पीड़ितों से मिलने जा रहे थे, तब भी उनकी यूपी पुलिस के साथ धक्कामुक्की हो गई थी। राहुल ने यूपी पुलिस पर लाठी मारने और जमीन पर फैंकने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। राहुल ने तब कहा था, मैं पूछना चाहता हूं कि क्या इस देश में सिर्फ मोदी जी को पैदल चलने का अधिकार है, हमारे जैसे आम लोग पैदल नहीं चल सकते। हमारी गाड़ियां रोकी गईं, इसलिए हम पैदल चल रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी को एक्सप्रेस-वे पर रोक दिया गया था। वहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं और यूपी पुलिस के बीच धक्कामुक्की हुई थी। उसमें राहुल और प्रियंका गांधी का सुरक्षा घेरा कमजोर पड़ गया था। सीआरपीएफ कमांडो को यूपी पुलिस की ओर से वह सहयोग नहीं मिल सका, जो वीवीआईपी सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति को दिए जाने का प्रोटोकॉल है। उस वक्त कार्यकर्ता, मीडिया और यूपी पुलिस, राहुल गांधी का सुरक्षा घेरा तोड़कर आगे आ चुके थे। जब राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के पास एसपीजी सुरक्षा घेरा था, तब किसी भी राज्य में लोकल पुलिस और कार्यकर्ता एक निर्धारित दूरी बनाए रखते थे।