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Suicide Rate: राहुल गांधी ने युवाओं में बढ़ती आत्महत्या दर पर जताई चिंता, बेरोजगारी, पेपरलीक समेत मुद्दे गिनाए

Sat, 31 Aug 2024 10:44 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

राहुल गांधी ने कहा कि यह सामाजिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक रूप से बहुत गहरी समस्याओं की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा, भारी बेरोजगारी, पेपर लीक, शिक्षा में भ्रष्टाचार, महंगी पढ़ाई, सामाजिक उत्पीड़न, आर्थिक असमानता, अभिभावकों का दबाव - आज के छात्र ऐसी अनगिनत समस्याओं से जूझते हुए सफलता पाने की कोशिश कर रहे हैं।
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कांग्रेस सांसद राहुल गांधी - फोटो : संवाद
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विस्तार
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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को युवाओं में बढ़ती आत्महत्या दर पर चिंता व्यक्त की और सरकार से छात्रों की राह आसान बनाने के लिए बाधाओं के बजाय समर्थन सुनिश्चित करने का आग्रह किया। पूर्व कांग्रेस प्रमुख ने अपने व्हाट्सएप चैनल पर एक पोस्ट में कहा कि देश में युवाओं में बढ़ती आत्महत्या दर बहुत दुखद और चिंताजनक है।
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भारत में आज सबसे बड़ी युवा आबादी- राहुल
उन्होंने कहा पिछले दशक में, जबकि 0-24 आयु वर्ग के बच्चों की आबादी 58.2 करोड़ से घटकर 58.1 करोड़ हो गई, छात्रों की आत्महत्या की संख्या चौंकाने वाली 6,654 से बढ़कर 13,044 हो गई। भारत में आज सबसे बड़ी युवा आबादी है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि युवाओं को सुविधाएं प्रदान करने के बजाय कठिनाइयों और मजबूरियों का सामना करना पड़ रहा है।

सड़क से संसद तक लड़ाई जारी रखूंगा- राहुल
उन्होंने कहा, मैं सरकार से उम्मीद करता हूं कि वह छात्रों और युवाओं की इस कठिन राह को आसान बनाने के लिए हर संभव योजना बनाए, उन्हें सहयोग प्रदान करे, उनके मार्ग में बाधाएं न डालें। इस दौरान उन्होंने कहा कि छात्रों के माता-पिता और अभिभावकों से अनुरोध है कि वे उन्हें मानसिक समर्थन और प्रोत्साहन दें। राहुल गांधी ने आगे कहा मेरी देश के युवाओं से अपील है - समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाएं, सवाल पूछें, अपने अधिकारों की मांग करें - डरें नहीं! मैं आपके साथ खड़ा हूं और आपको आपके अधिकार दिलाने के लिए सड़क से संसद तक लड़ाई जारी रखूंगा।
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एनसीआरबी के आंकड़ों पर आयी एक रिपोर्ट
राहुल गांधी की ये टिप्पणी एक नई रिपोर्ट के कुछ दिनों बाद आई है जिसमें कहा गया है कि भारत में छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं हर साल खतरनाक दर से बढ़ रही हैं, जो जनसंख्या वृद्धि दर और कुल आत्महत्या प्रवृत्तियों से भी अधिक है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के आधार पर, रिपोर्ट - छात्र आत्महत्या: भारत में फैल रही महामारी - बुधवार को वार्षिक आईसी3 सम्मेलन और एक्सपो 2024 में लॉन्च की गई।

महिला छात्र आत्महत्याओं में 7 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि जहां कुल आत्महत्या की संख्या में सालाना 2 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है, वहीं छात्र आत्महत्या के मामलों में 4 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है, जबकि ऐसे मामलों की कम रिपोर्टिंग की संभावना है। पिछले दो दशकों में, छात्र आत्महत्याओं में 4 प्रतिशत की खतरनाक वार्षिक दर से बढ़ोत्तरी हुई है, जो राष्ट्रीय औसत से दोगुनी है। 2022 में, कुल छात्र आत्महत्याओं में पुरुष छात्रों की संख्या 53 प्रतिशत (प्रतिशत) थी। आईसी3 संस्थान की तरफ से तैयार की गई रिपोर्ट में कहा गया है, 2021 और 2022 के बीच, पुरुष छात्र आत्महत्याओं में 6 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि महिला छात्र आत्महत्याओं में 7 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। छात्र आत्महत्याओं की घटनाएं जनसंख्या वृद्धि दर और समग्र आत्महत्या प्रवृत्तियों दोनों को पार करती जा रही हैं।
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