केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के राज्यसभा में कोरोना से डॉक्टरों की मौत के मामले पर दिए गए एक बयान से हंगामा खड़ा हो गया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि कोरोना के कारण देश में अब तक 162 डॉक्टरों की मौत हुई है जबकि डॉक्टरों के संगठन इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का कहना है कि अब तक देश में कम से कम 734 डॉक्टरों की कोरोना मरीजों की इलाज करने के दौरान मौत हो चुकी है। संगठन ने सरकार से इस मामले पर उच्चस्तरीय जांच कराने की भी मांग की है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राजन शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्रीय मंत्री पहले तो एक बयान देते हैं कि सरकार के पास इस तरह का कोई आंकड़ा नहीं है कि देश में कोरोना के कारण कितने डॉक्टरों की मौत हुई है। लेकिन अब जब सरकार कुछ आंकड़े पेश कर रही है तो वो सच्चाई से बहुत दूर है। उन्होंने कहा कि हमारी जानकारी के मुताबिक अब तक कम से कम 734 डॉक्टरों की कोरोना मरीजों की देखभाल के दौरान हुए संक्रमण के कारण मौत हो चुकी है। सरकार को इस मामले में एक जांच कराकर कोरोना योद्धाओं को उचित श्रद्धांजलि देनी चाहिए।
डॉक्टरों ही नहीं, नर्सों की मौतों के आंकड़ों पर नर्सिंग संगठन नाराज हैं। उनका कहना है कि सरकार सही आंकड़े पेश नहीं कर रही है। दिल्ली नर्सेज फेडरेशन के अध्यक्ष एलडी रामचंद्रन ने बताया कि लगता है कि सरकार ने केवल उन्हीं नर्सों की मौतों का आंकड़ा पेश किया है जिनकी मौत सरकारी अस्पतालों में हुई है। जबकि सच्चाई है कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था प्राइवेट अस्पतालों पर टिकी हुई है जहां लाखों की संख्या में नर्सें काम कर रही हैं। ऐसे लोगों की मौत का कोई आंकड़ा सरकार के पास नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार को एक कमेटी का गठन कर सभी कोरोना योद्धाओं की मौत का सही आंकड़ा पेश करना चाहिए। चूंकि नर्सें बहुत कम वेतन पाती हैं और वे ही अपने परिवार की आर्थिक कमाई का बड़ा स्रोत थीं, सरकार को ऐसी नर्सों के परिवारों को आर्थिक सहायता भी मुहैया करानी चाहिए।
आशा कार्यकर्ताओं के किसी बड़े संगठन के अभाव में उनकी मांगों की भी हमेशा उपेक्षा होती रही है। आशा कार्यकर्ताओं ने भी मांग की है कि सरकार को उनके काम को महत्व देना चाहिए और आशा कार्यकर्ताओं के परिवारों को मदद उपलब्ध करानी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने मंगलवार को राज्यसभा में एक बयान देते हुए कहा कि कोरोना के कारण देश में अब तक 162 डॉक्टरों, 107 नर्सों और 44 आशा कार्यकर्ताओं की मौत हुई है।