दरअसल, कुमार विश्वास द्वारा एक समाचार एजेंसी को दिए गए साक्षात्कार से पहले उन्होंने 'ट्रांसपेरेंसी' वेब सीरीज में कुछ ऐसा ही कहा था। तब उतना बवाल नहीं मचा था। चूंकि अब चुनाव है तो कुमार विश्वास का बयान तेजी से वायरल हो गया। वेब सीरिज बनाने वाले डॉ. मुनीष रायजादा ने शिकागो से अमर उजाला डॉट कॉम के साथ विस्तृत बातचीत की है।
उन्होंने कहा कि ऐसे आरोप लगे हैं। खुद कुमार विश्वास ने उन्हें ये बातें बताई थी। पूर्व के विधानसभा चुनाव में आप नेताओं ने एनआरआई समुदाय का समर्थन हासिल करने के लिए कनाडा और आयरलैंड सहित कई देशों का दौरा किया था। वहां पर आप नेताओं ने चंदे के अलावा चुनाव में अन्य तरीके से मदद मांगी थी। आप के साथ जुड़ी रहीं अभिनेत्री गुल पनाग ने भी रायजादा द्वारा निर्मित वेब सीरिज 'ट्रांसपेरेंसी' में कुछ ऐसा ही इशारा किया था। केजरीवाल सरकार में वरिष्ठ मंत्री भी पार्टी के प्रचार के लिए आयरलैंड गए थे।
आप नेताओं का कहना है कि उन्होंने चंदे का दुरुपयोग नहीं किया। सारी केंद्रीय एजेंसियां इस बाबत जांच पड़ताल कर चुकी हैं। अगर आम आदमी पार्टी या उनके नेताओं के किसी खालिस्तानी से संबंध होते तो अब से बहुत पहले ही केंद्र सरकार उन्हें जेल में डाल चुकी होती। केंद्रीय एजेंसियों ने कई बार आप नेताओं के घरों एवं दफ्तरों पर छापे मारे हैं। उनमें कुछ नहीं निकला। चुनाव के मौके पर कुमार विश्वास और मुनीष रायजादा की ऐसी बयानबाजी का मतलब समझ आ रहा है। ये लोग किसी के बहकावे में आकर आप को पंजाब चुनाव में नुकसान पहुंचाना चाहते हैं।
बतौर कुमार, 'अरविंद केजरीवाल ने मुझसे कहा कि मुझे पंजाब का मुख्यमंत्री बनना है या स्वतंत्र देश (खालिस्तान) का प्रधानमंत्री।' ये बयान आते ही पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने भारत सरकार को पत्र लिखा। उन्होंने उक्त मामले की गहराई से जांच कराने की मांग की थी। शाह ने 18 फरवरी को पत्र का जवाब देते हुए लिखा, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और प्रतिबंधित संगठन 'सिख फॉर जस्टिस' के बीच कथित संबंधों की जांच होगी। बतौर अमित शाह, वे खुद इस मामले को देखेंगे।
शाह ने लिखा, आपके अनुसार एक राजनीतिक पार्टी का देश विरोधी, अलगाववादी एवं प्रतिबंधित संस्था से संपर्क रखना और चुनाव में सहयोग प्राप्त करना देश की एकता एवं अखंडता के दृष्टिकोण से अत्यंत गंभीर है। भारत सरकार ने इसे अत्यंत गंभीरता से लिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रतिबंधित 'सिख फॉर जस्टिस' के संस्थापक गुरपतवंत सिंह पन्नू को आतंकियों की सूची में शामिल कर रखा है।
एनआईए द्वारा पन्नू के ख़िलाफ केस दर्ज किया गया है। किसान आंदोलन के दौरान एनआईए ने उनकी कई प्रॉपर्टी भी जब्त की थी। बतौर जांच एजेंसी, इस आंदोलन को भड़काने में पन्नू की बड़ी भूमिका रही है। मुनीष रायजादा का आरोप था कि आप नेता, खालिस्तान से जुड़े लोगों से मिले थे। आज जो भी आरोप लगाए हैं, वे गलत नहीं हैं। इस मामले की जांच उसी वक्त हो जानी चाहिए थी, जब 'ट्रांसपेरेंसी' में कुमार विश्वास ने पहली बार उक्त खुलासा किया था।
दरअसल, डॉ. मुनीष ने एनआरआई समुदाय के बीच 'आप' को स्थापित करने का बड़ा काम किया था। पार्टी को विदेशों से चंदा दिलाने और प्रचार में उनकी अहम भूमिका रही थी। उन्होंने कई देशों में रह रहे भारतीयों का एक समूह बनाया। वहां से दिल्ली के लोगों को फोन कराए गए। इसमें केजरीवाल को विजयी बनाने की अपील की गई। इस अपील का खासा असर हुआ था। 2015 में चुनाव जीतने के बाद केजरीवाल ने जंतर मंतर पर आयोजित एक जनसभा में डॉ. मुनीष का हाथ पकड़ कर कहा था कि देखो ये डॉक्टर साहब कितनी दूर से मेरे लिए आए हैं। अपनी नौकरी छोड़कर 'आप' के लिए काम कर रहे हैं।
सत्ता आने के बाद केजरीवाल ने जब प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, प्रो. आनंद कुमार और अजीत झा जैसे लोगों को पार्टी से बाहर कर दिया। उसके बाद डॉ. मुनीष के साथ भी वैसा ही हुआ। डॉ. मुनीष ने इस पार्टी के बारे में जो कुछ सोचा था, वैसा कुछ नहीं था। बाद में उन्होंने 'आप' के चंदे में घालमेल को लेकर ट्रांसपेरेंसी वेब सीरिज बनाई। इसमें चंदे को लेकर एवं पार्टी नेताओं की सोच को लेकर कई रहस्यों से पर्दा हटा था। चंदाचोरी का मुद्दा उठाया गया।
आठ फरवरी 2020 को भाजपा की आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने अपने ट्वीट में लिखा, कुमार विश्वास ने खुलासा किया है कि केजरीवाल अपनी ही पार्टी के सिख नेताओं में लड़ाई करवा कर पंजाब का मुख्यमंत्री बनना चाहते थे। बीच में दिल्ली छोड़कर पंजाब जाने का इरादा बना लिया था।