लखनऊ विश्वविद्यालय (सांकेतिक तस्वीर)
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देश के शीर्ष पांच सौ वरिष्ठ साहित्यकारों, समाजसेवी कार्यकर्ताओं और लेखकों ने प्रोफेसर रविकांत पर दर्ज एफआईआर खारिज कराने की मांग की है। विद्वानों ने प्रोफेसर रविकांत के साथ अभद्रता करने वाले ABVP कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई करने की मांग की है। इन लेखकों में रामचंद्र गुहा, आकार पटेल, प्रोफेसर अपूर्वानंद, शबनम हाशमी, दिलीप मैनन, आदित्य निगम और अन्य शामिल हैं।
प्रोफेसर रविकांत ने एक यूट्यूब चैनल पर एक शो के दौरान पट्टाभीसीतारमैया की पुस्तक में दिए गए एक उद्धरण का हवाला देते हुए कुछ टिप्पणियां की थी जिस पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कुछ छात्र नाराज हो गए। बताया गया है कि सोशल मीडिया पर दिए गए इस बयान के बाद एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने अगले ही दिन सुबह प्रोफेसर रविकांत के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की। मामला खराब होते ही पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर मामला शांत कराया।
लेकिन लखनऊ विश्वविद्यालय में हिंदी के प्रोफेसर रविकांत के पक्ष का आरोप है कि शिकायत करने के बाद भी पुलिस ने उनकी बात नहीं सुनी और उल्टे उनके ऊपर ही मुकदमा दर्ज कर दिया। प्रोफेसर रविकांत के बचाव में उतरे साहित्यकारों पत्रकारों और लेखकों ने सरकार से आग्रह किया है कि उनके ऊपर दर्ज एफआईआर रद्द की जाए और उन लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए जिन्होंने प्रोफेसर के साथ अभद्र व्यवहार किया है।