केंद्र सरकार ने सीबीआई में खाली पड़े अभियोजन निदेशक के पद को शीघ्रता से भरने के लिए विभिन्न मंत्रालयों से नामांकन मांगे हैं। सीबीआई निदेशक पद से आलोक वर्मा को पद से हटाने के बाद से एजेंसी में नियमित प्रमुख नहीं है। अधिकारियों ने सोमवार को बताया, अभियोजन निदेशक ओपी वर्मा का कार्यकाल भी 23 दिसंबर को पूरा हो गया। केंद्रीय जांच एजेंसी में अभियोजन निदेशक का पद अहम माना जाता है, जो एजेंसी को जांच संबंधी मामलों में कानूनी सलाह देता है।
अधिकारियों के मुताबिक सीबीआई निदेशक के नियंत्रण और निगरानी में काम करने वाले अभियोजन निदेशक की जिम्मेदारी एजेंसी की जांच के दायरे में आने वाले मामलों में कानूनी राय देना होता है। इस महत्वपूर्ण पद को भरने के लिए लिए कार्मिक मंत्रालय ने सभी सरकारी विभागों के सचिवों को पत्र लिखकर योग्य और इच्छुक अधिकारियों के नाम मांगे हैं।
सीबीआई के इतिहास में पहली बार है जब एजेंसी बिना निदेशक और अभियोजन निदेशक के काम कर रही है। पत्र के मुताबिक इस पद के लिए जिन अधिकारियों का नामांकन हो वो संयुक्त सचिव से नीचे की रैंक के नहीं होने चाहिए। साथ ही विशेष लोक अभियोजक के तौर पर नियुक्ति के लिए योग्य होने चाहिए। कार्मिक मंत्रालय ने 25 जनवरी से पहले नाम भेजने को कहा है ताकि नियुक्ति पर जल्द फैसला हो सके।
अभियोजन निदेशक पद पर नियुक्ति केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की अनुशंसा पर की जाती है। बता दें कि एक संसदीय समिति ने हाल ही में सीबीआई में रिक्त पदों पर चिंता जाहिर की थी और एजेंसी में खाली पदों को भरने के लिए सरकार से सरकार सक्रियता से कदम उठाने को कहा था। एक संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सीबीआई में कार्यकारी स्तर के 16 प्रतिशत, कानूनी अधिकारियों के 28 और तकनीकी स्तर पर करीब 56 प्रतिशत पद खाली हैं।