सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को सही मानते हुए कहा है कि, 2017 गुरुग्राम स्कूल हत्याकांड के आरोपी पर किशोर न्याय अधिनियम के तहत किशोर के रूप में मुकदमा चलाया जाना चाहिए।
हरियाणा के गुरुग्राम में 2017 में हुए बहुचर्चित प्रिंस हत्याकांड में मृतक के पिता को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने नाबालिग छात्र के पिता की याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि वारदात के समय आरोपी की उम्र साढ़े 16 साल थी। ऐसे में उसको नाबालिग मानकर ही मुकदमा चलाया जाना चाहिए।
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दरअसल, मृतक छात्र के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। इसमें हाईकोर्ट ने आरोपी पर बालिग के तौर पर मुकदमा चलाए जाने से इंकार कर दिया था। मृतक के पिता की मांग थी कि आरोपी को बालिग मानकर आगे की कार्रवाई की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को सही मानते हुए कहा है कि, 2017 गुरुग्राम स्कूल हत्याकांड के आरोपी पर किशोर न्याय अधिनियम के तहत किशोर के रूप में मुकदमा चलाया जाना चाहिए।
निजी स्कूल में हुई थी प्रिंस की हत्या
आठ सितंबर, 2017 को गुरुग्राम के एक निजी स्कूल में प्रिसं की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने बस चालकर को गिरफ्तार किया था। हालांकि, जब मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई तो पूरा मामला ही पलट गया। सामने आया कि छात्र की हत्या 16 साल के एक दूसरे छात्र ने की थी।