आज देश में हर कोई नामीबिया से लाए गए चीतों के बारे में बात कर रहा है। खास बात ये रही कि चीतों को प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर लाया गया। इस बीच अधिकारियों ने कहा इससे पहले मार्च 2009 में सिंगापुर से गुजरात के सक्करबाग चिड़ियाघर में लाए गए दो जोड़ी चीतों के प्रजनन के प्रयास असफल रहे।
राज्य के वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि दो जोड़ी चीते सिंगापुर चिड़ियाघर से एक एशियाई शेर और दो शेरनी के बदले लाए गए थे। उन्होंने कहा कि 24 मार्च, 2009 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक सार्वजनिक समारोह के बाद जूनागढ़ के सक्करबाग चिड़ियाघर में उन्हें रखा गया था।
सक्करबाग चिड़ियाघर के सहायक निदेशक नीरव मकवाना के एक नोट के अनुसार, जोड़े 2012 तक संभोग करने में विफल रहे। उनके मुताबिक चीतों के दो जोड़े मार्च 2009 में एक कार्यक्रम के तहत सिंगापुर चिड़ियाघर से लाए गए थे। वास्तव में, अच्छे प्रबंधन अभ्यास और पशु चिकित्सा देखभाल (सक्करबाग चिड़ियाघर में) के कारण, जोड़े 12 साल की उम्र तक वहां रहे।
नीरव मकवाना के नोट के अनुसार सिंगापुर चिड़ियाघर ने 2006 में अफ्रीकी चीतों के बदले सक्करबाग चिड़ियाघर से एशियाई शेरों को लाने का प्रस्ताव रखा था, और उस वर्ष अगस्त में भारतीय केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण द्वारा इसे मंजूरी दी गई थी।
जूनागढ़ की मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) आराधना साहू ने कहा कि दोनों जोड़े मार्च 2009 में 63 साल के अंतराल के बाद, एक शेर और दो शेरनी के बदले देश में पहुंचे थे। 12 साल की उम्र के बाद प्राकृतिक कारणों से दो जोड़े की मृत्यु हो गई। आखिरी चीते की मृत्यु 2017 में हुई।
वहीं 17 सितंबर को देश में एक बार फिर चीतों को लाया गया है। इस बार चीतों को दक्षिण अफ्रीका के नामीबिया से एयरलिफ्ट करके लाया गया है। पीएम मोदी ने अपने जन्मदिन के मौके पर खुद चीतों को मध्यप्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में छोड़ा।